धारचूला (पिथौरागढ़)। 27 मई 2017 को दुनिया की सबसे ऊंचे पर्वत पर चढ़ने के बाद पहली बार सोमवार को धारचूला पहुंचे योगेश गर्ब्याल का यहां लोगों ने जोरदार स्वागत किया। तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ओएनजीसी) में अधिशासी अभियंता के पद पर कार्यरत योगेश व्यावसायिक लाइसेंस धारक पायलट भी हैं।
अपने गृह क्षेत्र में मिले सम्मान से अभिभूत योगेश ने कहा कि वह पर्वतारोहण अभियान जारी रखेंगे। जनवरी में उनकी टीम लेह लद्दाख में विषम मौसम के बीच दो महीने तक ट्रैकिंग करेगी। उसके बाद अप्रैल में कंचनजंघा अभियान पर जाएगी। कोशिश की जाएगी कि कुछ नए रिकार्ड बनें और क्षेत्र का नाम रोशन हो।
पहली बार धारचूला आगमन पर रं कल्याण संस्था, रं कम्युनिटी स्कूल और क्षेत्र के गणमान्य लोगों ने गांधी चौक से रं संग्रहालय तक ढोल नगाड़े बजाकर उनका जोरदार स्वागत किया। रं संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में संस्था के संरक्षक अशोक नबियाल ने कहा कि योगेश ने एवरेस्ट फतह कर क्षेत्र की जीवट प्रतिभा का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि योगेश ने हमेशा क्षेत्र के सामाजिक गतिविधियों में भी हिस्सा लेते हैं। पिछले साल उनके सहयोग से ही धारचूला में मैराथन का आयोजन हुआ था।
जनजाति परिषद के उपाध्यक्ष कैलाश रावत ने कहा कि मुनस्यारी के लवराज धर्मशक्तू और धारचूला के योगेश गर्ब्याल की उपलब्धियों से क्षेत्र का नाम रोशन हुआ है। इन दोनों से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। कार्यक्रम में शिक्षाविद् द्रोपदी गर्ब्याल, प्रद्युम्न गर्ब्याल, महिमन ह्यांकी, दौलत फकलियाल, भीम सिंह रावत, विरेंद्र नबियाल, प्रधान गोपाल गर्ब्याल, मोहन ततवाल आदि उपस्थित थे।