पिथौरागढ़-धारचूला-तवाघाट एनएच की 30 मीटर सड़क कई स्थानों पर मलबे से पट गई है। यह मार्ग बृहस्पतिवार रात से बंद है। इसकी वजह से दूसरे दल के कैलास यात्रियोें को दूसरे रूट से धारचूला भेजना पड़ा। वाहनों को वाया नारायणनगर होते हुए 15 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। वहीं, बलुवाकोट में भी एनएच शुक्रवार दोपहर में तीन घंटे बंद रहा।
अस्कोट से दो किमी आगे तिनौड़ा गाड़ के पास एनएच पर भारी मात्रा मलबा गिरा था, जिससे कई स्थानों पर सड़क गायब हो गई। धारचूला जाने वाले वाहन वाया नारायणनगर होते हुए जा रहे हैं। सीमा सड़क संगठन ने शुक्रवार सुबह से ही सड़क को खोलने के प्रयास शुरू कर दिए, लेकिन भारी मात्रा में पड़े मलबे को हटाने और पहाड़ी को काटकर सड़क बनाने का काम इतना आसान नहीं था। बीआरओ की टीम दिनभर इस काम में लगी रही, लेकिन सड़क नहीं खुल पाई।
बीआरओ के द्वितीय कमान अधिकारी आरवी अग्रवाल ने बताया कि सड़क को भारी नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर नए सिरे से सड़क का निर्माण करना पड़ रहा है। सड़क शनिवार को ही खुल पाएगी। वहीं, हाइवे बंद होने से यात्री परेशान रहे। दोनों तरफ से वाहनों को लौटना पड़ा। नारायणनगर रूट से अस्कोट बाजार होते हुए यात्रा करनी पड़ी।
मौसम खराब, मालपा से लौटा हेलीकॉप्टर
धारचूला (पिथौरागढ़)/कपकोट। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रोज खराब हो रहा मौसम हेलीकॉप्टर सेवा में बड़ी बाधा पहुंचा रहा है। शुक्रवार को धारचूला से गुंजी के लिए उड़े हेलीकॉप्टर को बारिश और धुंध के कारण मालपा से लौटना पड़ा। मौसम ठीक होने के बाद हेलीकॉप्टर ने दोबारा गुंजी के लिए उड़ान भरी। शुक्रवार सुबह धारचूला से गुंजी के लिए हेलीकॉप्टर से चार यात्री निकले थे। बृहस्पतिवार को वापसी में हेलीकॉप्टर को मौसम खराब होने के कारण छिरकिला में इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी थी। उधर, कपकोट (बागेश्वर) ग्राम पंचायत में शुक्रवार को हुई भारी बारिश से चार कमरों का दो मंजिला मकान क्षतिग्रस्त हो गया। परिजनों ने वहां से भागकर जान बचाई लेकिन उनका घरेलूू सामान मलबे में दब गया।