पिथौरागढ़। सीमांत से रोडवेज की पुरानी बसों को सड़कों पर दौड़ाना निगम की मजबूरी बन चुका है। अधिकतर बसें अपनी उम्र पार कर चुकी हैं जो आए दिन खराब होकर वर्कशॉप में खड़ी हो रही हैं।
बीते पांच साल में 80 में से 24 बसें खराब होकर सड़कों से गायब हो चुकी हैं जबकि वर्तमान में अपनी उम्र पार कर चुकी 25 बसें सड़कों पर दौड़ रही हैं। डिपो बीते पांच साल से नई बसों का इंतजार कर रहा है जो खत्म नहीं हो रहा। ऐसे में यात्री पुरानी खटारा बसों में सफर करने के लिए मजबूर हैं।
पांच साल पूर्व तक पिथौरागढ़ डिपो के बेड़े में 80 बसें शामिल थीं। नई बस मिली नहीं और पुरानी बसें खराब होकर वर्कशॉप से बाहर नहीं निकल सकीं। नतीजतन बेड़े से 24 बसें कम हो गईं। वर्तमान में डिपो से सिर्फ 56 बसों का संचालन हो रहा है। वहीं 25 बसें अपनी उम्र पार कर चुकी हैं।
नई बस न मिलने से इन्हें सड़कों पर दौड़ाना निगम की मजबूरी बन चुका है। पुरानी बसें आए दिन यात्रियों को सड़कों पर धोखा दे रही हैं। नई बस कब मिलेंगी इसकी जानकारी भी डिपो को नहीं है। संवाद
दो महीने बाद भी 15 बसों की खराबी नहीं हो सकी दूर
पिथौरागढ़। दो महीने पहले पिथौरागढ़ डिपो की 15 बसों में खराबी आ गई थी इन्हें ठीक करने के लिए टनकपुर वर्कशॉप भेजा गया। हैरानी है कि अब तक इन बसों को ठीक नहीं किया जा सका और ये टनकपुर से वापस नहीं लौट सकी हैं। ऐसे में यात्री बसों की कमी से जूझते हुए टैक्सी में सफर करने के लिए मजबूर हैं। संवाद
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- नई बसों की मांग की गई है। उम्मीद है डिपो को जल्द नई बस मिलेंगी। पुरानी बसों की समय-समय पर मेंटनेंस की जाती है। - रवि शेखर कापड़ी, एआरएम, पिथौरागढ़।