पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिले में एक साल में 30 नवजातों की मौत हो चुकी है। इस लिहाज से औसतन दो से तीन नवजातों की हर माह मौत होती है।
पिथौरागढ़ में पांच लाख की आबादी के लिए एकमात्र महिला जिला चिकित्सालय है, जहां सुरक्षित प्रसव और नवजात की सुरक्षा की सभी सुविधाएं मौजूद हैं। जिला अस्पताल में सिजेरियन विधि से भी प्रसव कराए जाते हैं। अन्य अस्पतालों में अधिक सुविधाएं नहीं होने से जिले के धारचूला, मुनस्यारी, बेड़ीनाग, गंगोलीहाट, कनालीछीना आदि क्षेत्रों से प्रसव के लिए अधिकतर महिलाओं को जिला अस्पताल ही लाया जाता है।
यहां तक कि चंपावत जनपद से भी पेचीदा केसों को पिथौरागढ़ के लिए रेफर किया जाता है। सामान्य तौर पर जिला अस्पताल में प्रतिदिन पांच से आठ प्रसव होते हैं। किसी तरह की कमी या बीमारी से ग्रसित नवजात शिशुओं के लिए जिला अस्पताल में उपकरण रखे गए हैं। इसके बावजूद इस अस्पताल में हर माह दो से तीन नवजात शिशुओं की मौत हो जाती है।
एक अप्रैल 2017 से 31 मार्च 2018 तक महिला अस्पताल में 30 नवजात बच्चों की मृत्यु हो चुकी है। अस्पताल में स्टाफ डॉक्टर और स्टाफ नर्स की कमी है। अस्पताल का इन्फ्रास्ट्रक्चर पुराना है। मरीजों और तीमारदारों की अधिक भीड़ नवजात बच्चों में संक्रमण का कारण बनती हैं। -डा.निर्मला पुनेठा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पिथौरागढ़