पिथौरागढ़। उरेडा और वन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में पिरूल एवं अन्य प्रकार के ईंधनों से विद्युत उत्पादन की जानकारी दी गई। विकास भवन सभागार में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ परियोजना निदेशक डीआरडीए डीडी पंत ने किया।
उन्होंने कहा कि पिरूल से बिजली मिलने पर इसकी स्थानीय स्तर पर बिक्री की जा सकेगी और इससे आर्थिक लाभ मिलने के साथ ही स्थानीय लोगों को आय के स्रोत भी बढ़ेंगे। परियोजना अधिकारी उरेडा एके शर्मा ने बताया कि इसका उद्देश्य ग्रीष्मकाल में चीड़ की पत्तियों से होने वाली वनाग्नि की रोकथाम कराना और विद्युत उत्पादन द्वारा रोजगार के अवसर तथा राज्य की ऊर्जा की आवश्यकताओं को पूर्ण करना है।
उरेडा मुख्यालय देहरादून से आए प्रोजेक्ट इंजीनियर विनीत मल्ल, बेड़ीनाग स्थित अवनी संस्था के प्रतिनिधि ने भी विचार रखे। सहायक प्रबंधक जिला उद्योग केंद्र ने विभाग द्वारा दिए जाने वाले अनुदान की जानकारी दी। कार्यशाला में जिला विकास अधिकारी गोपाल गिरी, वन सरपंच, ग्राम प्रधान आदि थे।