बेड़ीनाग (पिथौरागढ़)। सांस्कृतिक रूप से भी समृद्ध बौराणी क्षेत्र के लोग इस साल भी कार्तिक पूर्णिमा के ऐतिहासिक मेले के आयोजन की तैयारी में जुटे हैं। शनिवार को मुख्य मेला और सांस्कृतिक आयोजन सैम मंदिर के प्रांगण में सुबह से शुरू हो जाएंगे।
मेले का मुख्य आकर्षण पुलईचापड़ गांव से लाई जाने वाली छिलके (चीड़ का ज्वलनशील पदार्थ) से निर्मित 27 फुट लंबी मशाल होती है। हर मेलार्थी इस मशाल के दर्शन अवश्य करता है। शनिवार रात 12 बजे मंदिर परिसर में मशाल पहुंचेगी। मंदिर की सात परिक्रमाओं के बाद इसे मंदिर परिसर में गाड़ दिया जाएगा। स्थानीय लोगों के अनुसार सैम मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा को लगने वाले मेले में मशाल लाने की परंपरा सदियों पुरानी है। लोग इसे सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक भी मानते हैं।
क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य और महोत्सव समिति के अध्यक्ष राजेंद्र बोरा का कहना है कि अगर यहां की ऐतिहासिक संस्कृति को प्रोत्साहित किया जाए तो यह क्षेत्र पर्यटन के क्षेत्र में विकसित हो सकता है। मशाल गाड़ने के बाद यहां देवता का जागरण और झोड़ा चांचरी के कार्यक्रम होंगे। सांस्कृतिक और लोक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अद्भुत समन्वय इस मेले में देखने को मिलता है। इस बार भी प्रसिद्ध चांचरी गायक धन राम मेले में पहुंचेंगे।
बौराणी में जुआ मेला अब नहीं होता
बौराणी में परंपरागत मेले के साथ यहां जुआ खेलने की कुप्रथा सदियों से चली आ रही थी। बाद में इस कुप्रथा ने इतना जबरदस्त रूप ले लिया था कि लोग इस मेले को जुआ मेले के रूप में जानने लगे। यहां तक कि कुमाऊं के अलावा मैदानी इलाकों के लोग भी इस मेले में जुएं में अपनी किस्मत आजमाने आने लगे। यहां परंपरागत मेले से कुछ दूरी पर लम्केश्वर की पहाड़ी पर जुएं के सैकड़ों फड़ों पर हजारों जुआरी अपनी किस्मत आजमाते थे, लेकिन इस कुप्रथा के साथ इलाके में कई विकृतियां भी आती गई। अलग राज्य के गठन के बाद क्षेत्र के जागरूक युवाओं ने प्रशासन के सहयोग से इसे बंद कराने का प्रयास तो किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। वर्ष 2004 में तत्कालीन एसडीएम श्रीश कुमार ने स्थानीय युवाओं के सहयोग से यहां जुआ बंद कराने में सफलता हासिल की। 2005 में बौराणी मेला एवं लोक संस्कृति महोत्सव की नींव रखी गई। तबसे यहां मेले में जुएं की परंपरा बंद हो गई और महोत्सव के माध्यम से यहां के सांस्कृतिक पक्ष में लगातार निखार आ रहा है। इस कुप्रथा को बंद कराने में अहम भूमिका निभाने वालों में बेड़ीनाग महाविद्यालय के तत्कालीन छात्रसंघ अध्यक्ष राजेंद्र बोरा, गिरधर सिंह, प्रकाश सिंह, धीरेंद्र सिंह और मुकुल का योगदान रहा।
आज सुबह 11 बजे उद्घाटन होगा
बौराणी मेला एवं लोक संस्कृति महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष राजेंद्र बोरा ने बताया कि बौराणी मेले का उद्घाटन शनिवार सुबह 11 बजे विधायक मीना गंगोला करेंगी। गंगोलीहाट की ब्लॉक प्रमुख गंगा बिष्ट महोत्सव की अध्यक्षता करेंगी। सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा करेंगे। इस मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में बेड़ीनाग की ब्लॉक प्रमुख रेखा भंडारी और जिला पंचायत उपाध्यक्ष बलवंत मेहरा मौजूद रहेंगे।