पिथौरागढ़। साहित्यकारों ने जनजाति धरोहर संग्रहालय के संस्थापक, साहित्यकार, इतिहासकार डॉ. शेर सिंह पांगती, प्रसिद्ध चित्रकार और पहाड़ के सरोकारों से जुड़े वी मोहन नेगी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए बाखली के संपादक डॉ. गिरीश पांडेय ने डॉ. पांगती और नेगी के निधन को पहाड़ी समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया। कवि प्रकाश जोशी ने दोनों को उत्तराखंड के सरोकारों से जुड़ी विभूति बताया। साहित्य संस्कृति मंच के सचिव चिंतामणि जोशी ने कहा कि डॉ. पांगती ने पर्वतीय समाज, संस्कृति, इतिहास और पर्यावरण पर अपनी यात्राओं से अनुभव इकट्ठा कर उपयोगी साहित्य का सृजन किया।
साहित्यकार महेश पुनेठा ने कहा कि डॉ. पांगती ने अपने संग्रहालय में जोहार और पहाड़ से जुड़ी आम आदमी की उपयोग की वस्तुओं का अद्भुत संग्रह किया। चित्रकार नेगी ने पहाड़ के सरोकारों को कविता, पोस्टरों में उकेर कर पहाड़ के लिए अनूठे काम किए। इस दौरान विक्रम नेगी, राजीव जोशी, दिनेश चंद्र भट्ट, भगवान रावत, कमलेश पाठक, ललित पंत, आशा सौन, नवीन शर्मा आदि ने भी विचार रखे।