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ग्रामीणों ने रामलीला के कपड़े महाकाली नदी में विसर्जित किए

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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। पलायन के कारण पहाड़ के गांव धीरे-धीरे खाली हो रहे हैं। आबादी सिमटने से गांवों में तमाम तरह की परंपराएं महज रश्म अदायगी भर रह गई हैं। लोगों की कमी के कारण गांवों में रामलीला तक का आयोजन बंद हो गया है। ऐसी ही स्थिति जब बिसखोली गांव में आई तो ग्रामीणों ने पूजा अर्चना के बाद रामलीला के कपड़े महाकाली नदी में विसर्जित कर दिए।
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दो दशक पूर्व तक पिथौरागढ़ जनपद के अधिकांश गांवों में रामलीला मंचन होता था। धीरे-धीरे पलायन होने के बाद गांवों में इस आयोजन के लिए लोगों की कमी खलने लगी। वर्तमान में गिने-चुने कस्बों में ही रामलीला का आयोजन होता है। मूनाकोट ब्लॉक के बिसखोली गांव में कुछ वर्ष पूर्व तक रामलीला मंचन किया जाता था। रामलीला देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचते थे। धीरे धीरे सुविधाओं के अभाव में गांव से लोगों का पलायन शुरू हुआ।

150 परिवार वाले गांव में अब 70 परिवार रह गए। आयोजकों की कमी हुई तो गांव वालों ने रामलीला मंचन करना बंद कर दिया। रामलीला मंचन नहीं होने से पात्रों के वस्त्र खराब हो रहे थे। इसको देखते हुए ग्रामीणों ने रामलीला के वस्त्र विसर्जित करने का निर्णय लिया। पुजारी बसंत बल्लभ जोशी, उपप्रधान नरेंद्र सिंह, निर्मल सिंह, पुष्कर सिंह, गणेश सिंह, दीवान सिंह, संजय सिंह, हिम्मत सिंह, चंचल सिंह सोमवार को कपड़ों के साथ झूलाघाट के लाटेश्वर धाम पहुंचे। पूजा अर्चना के बाद कपड़ों को महाकाली नदी में विर्सजित कर दिया गया।
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