पिथौरागढ़। उत्तराखंड परिवहन निगम के कर्मचारियों ने परिचालकों के खिलाफ की जा रही एकतरफा कार्रवाई का विरोध किया है। आरोप लगाया कि गड़बड़ी के लिए परिवहन मुख्यालय जिम्मेदार है और निशाना परिचालकों को बनाया जा रहा है।
पिथौरागढ़ डिपो परिसर में हुई कर्मचारियों की बैठक में कहा गया कि परिवहन निगम में आजकल जो घोटाला सुर्खियों में है, वह घोटाला न होकर साफ्टवेयर में किए गए बदलाव के कारण हुई गड़बड़ी है। निगम मुख्यालय से साफ्टवेयर में बदलाव करते हुए सीनियर सिटीजन के स्थान पर सांसद, विधायक का कोड डाल दिया गया।, जिसकी सूचना किसी भी डिपो को नहीं दी गई। ना ही किसी परिचालक को इस संबंध में प्रशिक्षण दिया गया। निगम में विशेष श्रेणी से 16 प्रकार के यात्रियों को शासन द्वारा निशुल्क यात्रा अनुमन्य है।
जिसका टिकट केवल मशीन पर अंकित होता है, यात्री को टिकट निर्गत नहीं होता है। इस कारण किस श्रेणी का टिकट अंकित हो रहा है, इसकी जानकारी परिचालक को नहीं हो पाती। कोड में बदलाव के कारण बुजुर्ग कोटे की यात्रा सांसद/विधायक कोटे में दर्ज हो गई। कहा गया कि मुख्यालय की गलती के लिए परिचालकों को सेवामुक्त किया जा रहा है, जो न्याय संगत नहीं है। निगम प्रशासन निर्णय वापस नहीं लेता है तो परिवहन निगम के सभी संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। बैठक में कर्मचारी नेता मोहन सिंह भंडारी, अनिल चंद्र जोशी, पवन पांडेय, संजय महर, पवन कुमार, प्रदीप त्रिपाठी, नवीन कोठारी, विरेंद्र कार्की आदि मौजूद थे।