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आईटीबीपी का 56वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया

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पिथौरागढ़/डीडीहाट। 14वीं वाहिनी आईटीबीपी जाजरदेवल (पिथौरागढ़) और 7वीं वाहिनी आईटीबीपी मिर्थी (डीडीहाट) ने बल का 56वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया।
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14वीं वाहिनी में कमांडेंट अशोक कुमार टम्टा ने सुबह 9 बजे बल का ध्वज फहराया। सहायक सेनानी प्रभाकर सिंह के नेतृत्व में भव्य परेड का आयोजन किया गया। कमांडेंट ने परेड की सलामी ली। कमांडेंट ने अधिकारी और जवानों को 56वें स्थापना दिवस की शुभकामना दी। महानिदेशक प्रतीक चिन्ह से सम्मानित होने वाले वाहिनी के छह पदाधिकारियों को बधाई दी।

कमांडेंट ने बल के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत-चीन सीमा की सुरक्षा के लिए 24 अक्तूबर 1962 को आईटीबीपी की स्थापना की गई। गठन के समय बल की केवल 4 वाहिनियां थी, जिनकी संख्या आज 60 हो गई है। 56 वर्षों में बल ने दुर्गम और बर्फीली सीमा पर अपने दायित्वों को सफलता पूर्वक निभाया है। स्थापना दिवस के मौके पर जलेबी दौड़, बोरा दौड़, रस्साकसी, तंबोला, म्यूजिकल चेयर, छलिया नृत्य प्रतियोगिता कराई गई और पुरस्कार बांटे गए। इस दौरान बड़ा खाना का आयोजन हुआ।
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उधर, डीडीहाट स्थित 7वीं वाहिनी आईटीबीपी में भी स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर भव्य परेड हुई। सेनानी महेंद्र प्रताप ने परेड की सलामी ली। सेनानी ने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों में हमारे जवान जिस प्रकार से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में अपनी सेवा दे रहे हैं, वह वाहिनी के लिए सम्मान की बात है। इस मौके पर आयोजित रस्साकस्सी प्रतियोगिता में एडम कंपनी ने गार्जियन कंपनी को 2-0 से हराकर जीत दर्ज की।
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इसके अलावा पूर्व सैनिकों के लिए आयोजित तकिया कवर पकड़ो प्रतियोगिता में पूर्व उप सेनानी लक्ष्मण सिंह टोलिया ने पहला स्थान प्राप्त किया। खेलकूद प्रतियोगिताओं में सुई-तागा दौड़, तीन टांग की दौड़, महिलाओं की कुर्सी दौड़ सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। विजेताओं को सेनानी ने पुरस्कार बांटे। इस मौके पर वाहिनी के सहायक सेनानी हरवंश लाल, डॉ. दीपोक गोगई, डॉ. राहुल, केंद्रीय विद्यालय के प्रधानाचार्य हरीश कुमार आदि मौजूद थे।
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