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कैलाश यात्रा के लिए मजदूरों, घोड़े वालों का पंजीकरण

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कैलाश यात्रा के लिए मजदूरों, घोड़े वालों का पंजीकरण
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धारचूला (पिथौरागढ़)। कैलाश मानसरोवर यात्रियों का सामान ले जाने एवं कठिन रास्तों पर यात्रियों को घोड़ों से सफर कराने के लिए मजदूरों और घोड़े वालों का पंजीकरण किया जा रहा है। हर यात्री दल में यात्रियों की संख्या के आधार पर मजदूरों और घोड़े वालों को तैनात किया जाएगा। पंजीकरण की प्रक्रिया जारी रहेगी।

कैलाश यात्रा में पिछले वर्ष तक कुल 250 घोड़े वालों और 400 मजदूरों को काम मिला था। एक पड़ाव से दूसरे पड़ाव तक यात्रियों का सामान पहुंचाने पर हर मजदूर को 500 रुपये की राशि मिलती है। यह राशि यात्री को खुद वहन करनी पड़ती है। इतनी ही राशि घोड़ेवालों को भी देनी पड़ती है। कुछ युवा यात्रियों को घोड़े की जरूरत नहीं होती और वह पूरा सफर पैदल कर लेते हैं।
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इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर घोड़े वालों (पोनी) और मजदूरों (पोर्टर्स) के संचालन की जिम्मेदारी कुमाऊं मंडल विकास निगम के पास है। निगम के यात्राधिकारी रमेश चंद्र जोशी, धारचूला पर्यटक आवासगृह के प्रभारी दीवान सिंह बिष्ट ने बताया कि जैसे-जैसे यात्रा दल आते जाएंगे, घोड़े वालों और मजदूरों को काम मिलता रहेगा। हर आवेदक को अनिवार्य रूप से काम मिलेगा।
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पिछले वर्ष घोड़े वालों और मजदूरों को काम देने के मामले में भारी धांधली होने के बाद कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक धीराज गर्ब्याल ने इस व्यवस्था का संचालन निगम के माध्यम से कराने का आदेश दिया था। पंजीकरण की प्रक्रिया को महेश कांडपाल, रमेश मेहरा, जगदीश बुदियाल, किशन सिंह गर्ब्याल निपटा रह हैं। प्रथम यात्री दल के साथ घोड़े वाले और मजदूर 14 जून की सुबह नारायणआश्रम से जाने लगेंगे।
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