पिथौरागढ़। सीमांत क्षेत्र में फल और सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग की कवायद तेज हो गई है। प्रधानमंत्री कृषि विकास योजना के अंतर्गत उद्यान और रेशम विभाग के 106 कलस्टर बनाए गए हैं। इन कलस्टरों में किसानों को जैविक सब्जी और फल उत्पादन के बारे में गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
मुख्य उद्यान अधिकारी मीनाक्षी जोशी ने बताया कि योजनांतर्गत आठों विकास खंडों विण, मूनाकोट, कनालीछीना, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग, डीडीहाट, मुनस्यारी, धारचूला में कलस्टर बनाए गए हैं। एक कलस्टर में 20 हेक्टेयर जमीन ली गई है। इन कलस्टरों में मटर और मूली पर फोकस किया जाएगा। आर्गेनिक बोर्ड से किसानों के उत्पादों का जैविक सर्टिफिकेशन किया जाएगा। कृषि विभाग को नोडल बनाया गया है।
मुख्य कृषि अधिकारी अमरेंद्र चौधरी ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत सीमांत जिले में तीन हजार हेक्टेयर भूमि पर जैविक उत्पादन करने का कार्य गतिमान है। किसानों को जैविक उत्पादों के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही उन्हें वर्मी पिट के गड्ढे दिए जा रहे हैं। उत्पादों को जैविक उत्पाद परिषद से प्रमाणिक कराया जाएगा।
बता दें कि मुनस्यारी और धारचूला के ऊपरी क्षेत्रों में राजमा का अच्छा उत्पादन होता है। बावजूद अभी यह जैविक नहीं है। अब जैविक उत्पाद की गतिविधियां बढ़ने से भविष्य में किसानों को अपने उत्पादों का अच्छा लाभ मिलेगा।