थल (पिथौरागढ़)। थल के बालेश्वर महादेव के मंदिर में सातूं-आठूं का आयोजन किया गया। ठुल खेल, चांचरी में भगवान शिव-पार्वती के विवाह, महाभारत और रामायण का गायन के जरिये बखान किया गया।
अस्याली और तड़ीगांव के लोगों ने मंदिर में ठुल खेल लगाया। ठुल खेल (चांचरी की एक विधा) के अंतर्गत आने वाले चालली धुमरी औक खड़ा खेल की सुंदर प्रस्तुति दी। हो रही जैजैकार जनकपुर जाना है, सीता राम को ब्याह भयो जनकपुर जाना है, के बोल मंदिर में गूंजे।
ठुल खेल के ज्ञाता दलीप चंद, भानी चंद, खड़क चंद, किशन चंद, दीवान चंद, कुंदन चंद, भरत चंद, केजी पंत, गंगा सिंह मेहता, भूपाल भट्ट, मनोहर सिंह के नेतृत्व में गायन हुआ। महिलाओं ने ओ मेरा भीना मल्ली- मल्ली पिनाल लगा दे, रामगाड़ रामढोला घम घम भली बाजन, गाड़ की चिफली ढुंगा को ढुंगा टेकुल, मेर सुवा तेर लटी में भल छाजी रे लाल रिबन आदि गीतों की प्रस्तुति दी। शिव मंदिर के पुजारी गोविंद भट्ट ने खेल के अंत में हवा में फले उछाले। महिलाओं, बच्चों और पुरुषों में प्रसाद प्राप्त करने की होड़ मची रही।