पिथौरागढ़। जिले में फायर सीजन के तीन माह के भीतर 111 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में जंगल आग की भेंट चढ़ चुके हैं। अब तक वनाग्नि की 49 घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें अमूल्य वन संपदा जलने के साथ ही लाखों का नुकसान हुआ है। सीएम ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में वनाग्नि पर चिंता जताते हुए प्रशासन को संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
15 फरवरी से शुरू हुए फायर सीजन से अब तक जिले में 111.60 हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं। वन विभाग के सीधे नियंत्रण वाले रिजर्व वन क्षेत्र में आग की 23 घटनाएं हो चुकी हैं, जबकि प्रशासन और ग्रामीणों की जिम्मेदारी वाले सिविल जंगलों में आग की 26 घटनाएं हुई हैं। इन घटनाओं में अमूल्य वन संपदा को खासा नुकसान उठाना पड़ा है, जबकि सीधे तौर पर 2.45 लाख की क्षति पहुंची है।
जिले में सर्वाधिक वनाग्नि डीडीहाट, बेड़ीनाग, अस्कोट, गंगोलीहाट में हुई है, जबकि धारचूला और मुनस्यारी में आंशिक वनाग्नि हुई। अलबत्ता विण और मूनाकोट रेंज में न्यून वनाग्नि हुई है। वनाग्नि की घटनाओं से वन संपदा को तो नुकसान हुआ ही है, पर्यावरण को भी क्षति पहुंची है। वनाग्नि के बाद तापमान मेें वृद्धि हुई है और वातावरण मेें धुंध छाई है। इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।
इधर, बुधवार को वनाग्नि को लेकर हुई वीडियो कांफ्रेंसिंग में सीएम ने चिंता जताई है। उन्होंने प्रशासन को वनाग्नि की रोकथाम के लिए संयुक्त कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत रोकथाम के लिए पेयजल विभाग के साथ ही पुलिस और फायरब्रिगेड की भी मदद ली जाएगी। संयुक्त कार्ययोजना के तहत सीएम ने विभागों में आपसी तालमेल और संवाद पर जोर दिया। डीएम ने बताया कि वन विभाग को संबंधित विभागों के साथ मिलकर कार्ययोजना तैयार करने को कहा है।