थल (पिथौरागढ़)। मुवानी कस्बे और आसपास के गांवों में पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो गया है। कस्बे के लिए दो पेयजल योजनाएं होने के बावजूद पानी का संकट गहराता जा रहा है।
लोग प्राकृतिक स्रोतों से पानी की व्यवस्था करने को मजबूर हैं। कस्बे के लिए बड़ी योजना का निर्माण 1997 में हुआ था, लेकिन निर्माण के समय से ही इसमें अव्यवस्था रही। तड़ीगांव नदी से बनी इस योजना में कभी भी सही से पानी की सप्लाई नहीं हो पाई। दूसरी पुरानी योजना 1960 में मारकुना गधेरे से बनी थी। इसके स्रोत में पानी लगातार कम हो रहा है।
मुवानी के लोगों का कहना है कि योजनाओं की सही ढंग से देखरेख न होने के कारण जल संकट गहराता जा रहा है। लोगों की मांग है कि कस्बे की बढ़ती आबादी को देखते हुए नई पेयजल योजना का प्रस्ताव तैयार किया जाए और पहले से चल रही योजनाओं की मरम्मत कर पानी चलाया जाए।
इस संबंध में जल संस्थान के अवर अभियंता मनोज भट्ट ने बताया कि मारकुना गधेरे से बनी पेयजल योजना का पानी संग्रह करने के लिए मुवानी के पास बड़ी टंकी का निर्माण किया जाएगा। वहां से पानी का वितरण होगा। तड़ीगांव योजना के बारे में उनका कहना है कि योजना की हाल ही में मरम्मत की गई है। इसके बावजूद योजना में पानी क्यों नहीं चल रहा है, इसका निरीक्षण किया जाएगा।
नई योजना ही एकमात्र समाधान
पेयजल की दोनों पुरानी योजनाएं नाकाम हो चुकी हैं। विभाग को आसपास के किसी स्रोत या नदी का सर्वे कर नई योजना का प्रस्ताव बनाना चाहिए। योजनाओं की मरम्मत में जितना धन खर्च हो रहा है, उतने में तो नई योजना तैयार हो जाती। कस्बे की आबादी लगातार बढ़ रही है और गर्मियों में प्राकृतिक स्रोत सूख जाते हैं।
- कमलदीप बिष्ट, स्थानीय निवासी, मुवानी।
पानी कम होने के कारण खोजे जाएं
तड़ीगांव नदी में पर्याप्त पानी है। शुरू में यहां से बनी योजना सही ढंग से चली। अब योजना का पानी लगातार कम होने के कारणों की कोई जांच नहीं की गई है। विभाग मरम्मत के नाम पर धन तो खर्च करता है, लेकिन उसके सही परिणाम सामने नहीं आते। तड़ीगांव योजना में आई कमियों को दूर किया जाए और लोगों को पानी उपलब्ध कराया जाए।
- संजय वर्मा, स्थानीय निवासी, मुवानी।