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भालू ने मक्का तो सेही ने आलू-राजमा उजाड़ा

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धारचूला (पिथौरागढ़)। सीमांत विकास खंड के ऊपरी क्षेत्रों के ग्रामीण विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। सरकारी उपेक्षा से ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका कहना है कि वह विषम भौगोलिक परिस्थितियों में गांवों का आबाद किए हैं। बावजूद इसके उनकी कोई सुध नहीं ली जा रही है। ग्रामीणों ने मेहनत कर मक्का, आलू और राजमा की फसल उगाई। मक्का को भालू तो आलू-राजमा को सेही चट कर गए।
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धारचूला के ऊपरी क्षेत्र के जिप्ती, गाला, सिमखोला, तांकुल आदि गांवों में रहने वाले ग्रामीण बेहद विषम परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे हैं। क्षेत्र में फसल के नाम पर मक्का, आलू और राजमा होता है। इसे बेच कर ग्रामीण अपनी आजीविका चलाते हैं। जिप्ती की दीपा थापा, पुष्पा रायपा, कोंकरा देवी ने बताया कि इस बार भालुओं ने मक्का और सेही ने आलू-राजमा को खत्म कर दिया है। ग्रामीणों ने खेतों में गेहूं की फसल उगाना पहले ही बंद कर दिया।

गाला, जिप्ती में करीब 150 परिवार रहते हैं। ग्रामीणों को गंभीर पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है। पानी उपलब्ध कराने के लिए कई बार अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। जूनियर हाईस्कूल गाला में शिक्षक नहीं हैं। ग्रामीण बच्चों को पढ़ाने के लिए धारचूला भेजते हैं। महिलाओं ने बताया कि सरकारी योजनाओं का लाभ भी उन तक नहीं पहुंच पाता है।
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