बेड़ीनाग (पिथौरागढ़)। पद्मभूषण से सम्मानित प्रख्यात भूगर्भवेत्ता प्रो.केएस वल्दिया ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीकी उपयोग से पहाड़ के लिए बेहद हितकारी है। यहां उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र एवं पंचायतीराज विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में मुख्य अतिथि प्रो.वल्दिया ने कहा कि ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक एवं निजी परिसंपत्तियों का जिओ टैगिंग (मानचित्रण) होने से विकास कार्यों में मदद मिलेगी। भूस्खलन, जंगलों में आग और संभावित भूकंप में अधिक मदद ली जा सकती है। पलायन, शिक्षा एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्रों में भी यह अहम साबित होगा, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण पंचायतों का सशक्तीकरण होना है।
उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र के निदेशक डॉ.एमपीएस बिष्ट ने कहा कि पंचायतीराज संस्थानों का स्थानिक सशक्तीकरण (ईपीआरआई एस) परियोजना के अंतर्गत पिथौरागढ़ जिले की सार्वजनिक, सरकारी, वन संपदा, कृषि सहित कई परिसंपत्तियों को मोबाइल एप्लीकेशन द्वारा मानचित्रण किया जा रहा है। परियोजना अधिकारी वैज्ञानिक डॉ.गजेंद्र सिंह ने बताया कि यह परियोजना देश में पाइलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाई जा रही है। उत्तराखंड में इसके लिए पिथौरागढ़ जिले का चयन किया गया है।
अध्यक्षता करते हुए क्षेत्र प्रमुख रेखा भंडारी ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीकी उपयोग से पर्यटन के क्षेत्र को भी फायदा होगा। कार्यशाला का संचालन करते हुए यू-सेक वैज्ञानिक डॉ.शशांक लिंगवाल ने बताया कि अब तक जिले की 375 से अधिक ग्राम पंचायतों में 15000 से अधिक ग्राम परिसंपत्तियों का मानचित्रण हो गया है। कार्यशाला में बीडीओ जीवन आर्या, डॉ. प्रकाश मठपाल, विनीत पाल, अरविंद पांडे के अलावा ग्राम प्रधान आदि मौजूद थे।