पिथौरागढ़। इलाज में लापरवाही पर हुई मजिस्ट्रेटी कार्रवाई पर जिला महिला अस्पताल की चिकित्सक और स्टाफ भड़क उठा है। उन्होंने एकतरफा कार्रवाई का आरोप लगाते हुए मजिस्ट्रेटी जांच की समीक्षा की मांग की है। साथ ही 16 अप्रैल से दो घंटे कार्यबहिष्कार की चेतावनी दी है।
बृहस्पतिवार को अस्पताल के चिकित्सक और स्टाफ ने कार्रवाई के विरोध में प्रदर्शन किया। कहा कि लापरवाही के मामले में चिकित्सक और स्टाफ के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई हुई। एक व्यक्ति की शिकायत पर एकतरफा सुनवाई के साथ फैसला कर दिया गया। उन्होंने लापरवाही के आरोपों को बेबुनियाद बताया और मजिस्ट्रेटी जांच की समीक्षा की मांग की।
इससे पहले चिकित्सक और स्टाफ की पीएमएस कार्यालय पर बैठक हुई। इसमें पीएचएमएस संघ, नर्सेज संघ, डिप्लोमा फार्मेसिस्ट, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी संगठन भी शामिल हुए। बैठक में इलाज के दौरान आने वाली समस्याओं को लेकर चर्चा हुई। इसमें मजिस्ट्रेटी जांच की कार्रवाई को लेकर रोष जताया गया। साथ ही विरोध स्वरूप आंदोलन को लेकर चर्चा हुई।
चिकित्सक और स्टाफ ने मांगी सुरक्षा
अस्पताल के चिकित्सकों और स्टाफ ने सुरक्षा की मांग की है। आंदोलन के बीच हुई बैठक में चिकित्सक और स्टाफ ने कहा कि असामाजिक तत्व अस्पताल में असुरक्षा और भय का वातावरण बना रहे हैं। आरोप लगाया कि कई तीमारदार शराब पीकर स्टाफ से अभद्रता करते हैं, लेकिन अस्पताल में सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे चिकित्सक और स्टाफ असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने अस्पताल में 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है।
क्या था मामला
जिला महिला अस्पताल में पिछले साल अक्तूबर में सेरा निवासी प्रसूता ममता मेहता को भर्ती किया गया था। प्रसव के दौरान महिला की हालत बिगड़ गई। बाद में नवजात ने हल्द्वानी के एसटीएच में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। इस मामले में परिजनों ने चिकित्सक एवं स्टाफ पर इलाज में लापरवाही और अभद्रता का आरोप लगाया था। जिला अस्पताल में ही नवजात को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि उसकी मौत हल्द्वानी में हुई थी। इस मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के बाद चिकित्सक और स्टाफ पर लगे आरोप सही पाए गए। इसके बाद डीएम ने आरोपी चिकित्सक और स्टाफ की सेवा समाप्त करने के साथ ही विधिक कार्रवाई के निर्देश दिए थे।