थल (पिथौरागढ़)। आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हुई गोबराड़ी से मुवानी तक बनी नौ किलोमीटर लंबी नहर जून 2016 से बंद पड़ी है। इस कारण 1500 हेक्टेयर जमीन पर पानी नहीं पहुंच पा रहा है। किसान इस अव्यवस्था से खासे नाराज हैं। वहीं, सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नहर की मरम्मत के लिए शासन से अब तक धन नहीं मिला है। किसानों का कहना है कि यदि नहर कम क्षतिग्रस्त होती तो खुद ही मरम्मत कर पानी चला लेते।
गोबराड़ी-मुवानी नहर से सेरा, अमतोड़ी, सील, रोपाड़, पालड़ी, प्यांतड़, महिला आश्रम, दिगरा, मुवानी, सैना, बोराइजर, झूलागाड़ा, गुरीना गांव में खेतों की सिंचाई होती है। इस उपजाऊ घाटी में इस नहर का निर्माण 1950 में हो गया था। पिछले कुछ वर्षों से आपदा से नहर को नुकसान पहुंचने लगा है। इस बार नहर गोबराड़ी और खोलाखेत के पास इस तरह टूट गई है कि नहर का नामोनिशान ही मिट गया है।
सिंचाई विभाग के अवर अभियंता ललित उप्रेती ने बताया कि नहर की मरम्मत के लिए 13 लाख रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। अब तक यह धनराशि स्वीकृत नहीं हो पाई है। उन्होंने कहा कि शासन से पैसा मिलते ही नहर की मरम्मत का काम शुरू कर दिया जाएगा।
मुवानी निवासी सोबन सिंह कार्की और रमेश बम ने कहा कि इतनी बड़ी नहर का बंद होना गंभीर चिंता का विषय है। खेतों को पानी न मिलने से फसल उत्पादन पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि फसलों के साथ-साथ सब्जी उत्पादन भी ठप है। किसान इस समय गेहूं बुआई की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन खेत सूखे पड़े हैं। जल्दी नहर की मरम्मत न होने पर किसान आंदोलन करेंगे।