जीआईसी गंगोलीहाट का जर्जर भवन। संवाद
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। जीआईसी गंगोलीहाट के जर्जर भवन में 173 छात्र-छात्राएं पढ़ने को मजबूर हैं। इसके बाद भी नया भवन के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। विद्यालय में लंबे समय से प्रवक्ताओं के चार पद भी रिक्त चल रहे हैं। यहां शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर भी कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इससे अभिभावकों में नाराजगी है।
जर्जर हालत में पहुंचे विद्यालय भवन के चार कमरों को विभाग ने चार साल पहले बंद कर दिया था। सात कक्षाओं के अलग-अलग सैक्नश, प्रधानाचार्य और स्टाफ रूम के लिए विद्यालय को 14 कमरों की आवश्यकता है। विद्यालय प्रशासन अभी मात्र छह कमरों में काम चला रहा है। भवन की दीवारें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। जानकारी के अनुसार 2020 में नये भवन का आंकलन तैयार कर शासन को भेजा जा चुका है जो अभी तक लंबित है।
विज्ञान वर्ग की छात्राओं के लिए लैब की कोई व्यवस्था नहीं है। विद्यालय में लंबे समय से प्रधानाचार्य का पद भी रिक्त चल रहा है। विद्यालय में प्रवक्ताओं के नौ पद सृजित हैं जिसमें से रसायन विज्ञान, हिंदी, भौतिक विज्ञान और संस्कृत के पद रिक्त चल रहे हैं। मुख्य शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार जुकरिया का कहना है कि विद्यालय भवन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। शिक्षकों की नियुक्ति के लिए भी लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
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बंदरों का रहता है खौफ
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। जीआईसी गंगोलीहाट में चहारदीवारी भी नहीं है। देवदार के घने जंगल के बीच स्थित विद्यालय में आए दिन बंदरों का आतंक बना रहता है। अभिभावकों ने शीघ्र विद्यालय भवन निर्माण और चारदीवारी बनाने की मांग की है। संवाद