पिथौैरागढ़। पदोन्नति में आरक्षण देने के लिए 117वें संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में पारित कराने की कोशिश के विरोध में उत्तराखंड अधिकारी, कर्मचारी शिक्षक (सामान्य/पिछड़ा वर्ग) संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में सरकारी कर्मचारियों, निगम कर्मियों ने धरना देने के साथ ही प्रदर्शन किया।
मोर्चा ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने 27 अप्रैल 2012 को दिए फैसले में उत्तर प्रदेश की सरकारी नौकरियों में पदोन्नति में आरक्षण और ज्येष्ठता प्रदान करने के आदेशों को असंवैधानिक करार दिया है। पूर्ववर्ती सरकारों ने वोट की राजनीति के चलते पदोन्नति में आरक्षण का असंवैधानिक प्रावधान किया। एक बार फिर इस मामले में वोट की राजनीति शुरू हो गई है।
कहा गया कि राज्यसभा में 117वां संविधान संशोधन विधेयक पारित किया गया। लोकसभा में जागरूक सांसदों के विरोध के चलते यह विधेयक पारित नहीं हुआ। इन लोगों ने 117वें संविधान संशोधन विधेयक को निरस्त करने की मांग की है। धरना, प्रदर्शन में दिनेश चंद्र गुरुरानी, महिपाल डोबाल, कैलाश पुनेठा, दिनेश उपाध्याय, बाल किशन जोशी, ज्योति कुमार पांडे, चंद्रशेखर भट्ट, हरीश पंत आदि मौजूद थे।