धारचूला (पिथौरागढ़)। भारत-चीन व्यापार समिति एवं धारचूला नगर व्यापार मंडल ने दार्चुला (नेपाल) के सहायक मुख्य जिलाधिकारी शिवराज जोशी से मुलाकात कर शीतकालीन प्रवास से लौट रहे लोगों के आवागमन के लिए नजंगगाड़ और लखनपुर में अस्थायी पुलों की स्वीकृति देने की मांग की है। कहा है कि अप्रैल में व्यास घाटी के लोग माइग्रेशन से अपने मूल प्रवासों को लौटेंगे। लखनपुर से नजंगगाड़ तक रास्ता क्षतिग्रस्त होने से आवागमन संभव नहीं है।
धारचूला नगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष भूपेंद्र थापा, भारत चीन व्यापार समिति के अध्यक्ष जीवन रौंकली की अगुवाई में लोगों ने दार्चुला नेपाल के सहायक जिलाधिकारी से मुलाकात की। कहा कि माइग्रेशन से लौट रहे लोग यदि अप्रैल तक उच्च हिमालय स्थित मूल गांवों में नहीं पहुंच पाए तो अप्रैल के बाद झुप्पू, याक नस्ल के पशु गर्मी को बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे।
रास्ते की व्यवस्था न होने पर भारत के बूंदी गर्ब्यांग, नपलच्यू, गुंजी, नाभी, रौंकांग कुटी के साथ ही नेपाल के छांगरू, तिंकर के लोग भी भारी संकट से घिर जाएंगे। पालतू पशुओं की हानि हो सकती है। ज्ञापन सौंपने वालों में नवीन खर्कवाल, प्रकाश गुंज्याल, लक्ष्मण कौशल, दिनेश गुंज्याल, चक्र सिंह, बिशन सिंह, राजेंद्र सिंह आदि शामिल थे। दार्चुला के सहायक जिलाधिकारी ने कहा कि मुख्य जिलाधिकारी शासन से वार्ता के लिए काठमांडू गए हैं। शीघ्र ही इस समस्या का उचित समाधान निकाल लिया जाएगा।
समस्या को लेकर भारतीय प्रशासन गंभीर
माइग्रेशन पर लौटने वाले लोगों के सामने आ रही दिक्कतों को लेकर भारतीय प्रशासन भी गंभीर है। पिछले महीने भारत और नेपाल के अधिकारियों की बैठक में डीएम सी रविशंकर ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। भारतीय प्रशासन ने लखनपुर में अस्थायी पुल बनाकर नेपाल में प्रवेश करने के बाद नजंग जाने देने का विकल्प नेपाल प्रशासन के सामने रखा था। इस बीच भारत के साथ ही नेपाल की कई संस्थाओं ने भारत-नेपाल के बीच पारंपरिक रोटी-बेटी के संबंधों का हवाला देते हुए नेपाली प्रशासन से मुलाकात की थी, लेकिन अब तक नेपाल सरकार ने नेपाल से होते हुए रास्ता देने की अनुमति नहीं दी है।