पिथौरागढ़। जीएसटी को लेकर अनिश्चय अभी समाप्त नहीं हुआ है। व्यापारी भी इस प्रक्रिया को पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं। इस अनिश्चय के बीच रेस्टोरेंट और होटल मालिकों ने एक मुश्त टैक्स देने का यह तरीका निकाला है कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति के समय कुल बिक्री का पांच प्रतिशत टैक्स सरकार के पास जमा कर देंगे।
अभी छह महीने के लिए इस व्यवस्था को लागू किया गया है। रेस्तरां और होटल मालिक अपने ग्राहकों से जीएसटी की कोई राशि नहीं ले रहे हैं। अलबत्ता कुमाऊं मंडल विकास निगम ने अपने पर्यटक आवासगृहों में जीएसटी का निर्धारण कर दिया है। इसे धनराशि के हिसाब से अलग-अलग वर्गीकृत किया गया है। पर्यटक आवासगृहों में जीएसटी की राशि आठ प्रतिशत से लेकर 24 प्रतिशत तक पहुंच रही है।
उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष पवन कुमार जोशी ने बताया कि अभी किसी रेस्टोरेंट और भोजनालय में जीएसटी की राशि ग्राहकों से नहीं ली जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी कारण ग्राहक को दिए जाने वाले बिल में जीएसटी का कोई उल्लेख नहीं है। सभी रेस्टोरेंट और होटल मालिकों ने तय किया है कि वह इस व्यवस्था को छह महीने तक प्रयोग के तौर पर जारी रखेंगे। यदि इस व्यवस्था से व्यापार कर विभाग संतुष्ट हुआ तो इसे नियमित जारी रखा जाएगा। जीएसटी लागू होने के बाद वैट की राशि नहीं ली जाती।
उधर, कुमाऊं मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया कि आवासगृहों में आने वाले पर्यटकों से रहने और भोजन का अलग-अलग तरीके से जीएसटी लिया जाता है। इसका बाकायदा स्लैब बनाया गया है। एक हजार रुपये से कम की राशि पर जीएसटी नहीं लगता। इससे अधिक की राशि पर रकम के हिसाब से जीएसटी की राशि 8 से लेकर 24 प्रतिशत तक पहुंचने लगी है। यह व्यवस्था सभी आवासगृहों में समान तरीके से लागू हो चुकी है। पिथौरागढ़ पर्यटक आवासगृह के प्रबंधक दिनेश गुरुरानी ने बताया कि अब ग्राहकों को दिए जाने वाले बिल में जीएसटी की रकम जोड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि अब वैट की व्यवस्था समाप्त हो चुकी है।
इस तरह के अनिश्चय के बीच यदि वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक कोई समाधान नहीं निकला और रेस्टोरेंट मालिकों को राहत नहीं मिली तो अप्रैल से रेस्तरां एवं होटलों में रहने और खाने वालों की जेब जीएसटी के नाम पर कटने लग जाएगी।