पिथौरागढ़। सीमांत जिले में ग्रीष्मकालीन सीजन में 277.10 हेक्टेयर वन आग की भेंट चढ़े। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार आग लगने की घटनाओं में इजाफा हुआ। आग से वन विभाग को 6,22,575 रुपये के नुकसान का अनुमान है। जिले में पंचायत वन अधिक धधके।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पिछले वर्ष वनों में आग लगने की कुल 89 घटनाएं हुईं। इस वर्ष अब तक 127 घटनाएं हो चुकी हैं। आग से 277.10 हेक्टेयर वन क्षेत्र में नुकसान पहुंचा है। पंचायत वनों में 172.10 और आरक्षित वन में 105 हेक्टेयर क्षेत्र को नुकसान पहुंचा। डीडीहाट, पिथौरागढ़, बेड़ीनाग, अस्कोट वन रेंज में आग लगने की घटनाएं अधिक हुई हैं। वनों में आग से काबू पाने के लिए पंचायतों को लाखों की धनराशि मुहैया कराई गई। इसके बावजूद आग लगने पर पंचायतें वन विभाग का मुंह ताकती रहती हैं।
अच्छी घास की पैदावार के लिए जलते हैं वन
पिथौरागढ़। वनों में आग लगने की घटनाओं में प्रमुख कारण अच्छी घास की पैदावार मानी जाती है। पिरुल के जलने के बाद मिट्टी भुरभुरी हो जाती है। फायर सीजन समाप्त होने और बारिश शुरू होने पर घास की पैदावार काफी अच्छी होती है। वन विभाग के अधिकारियों का भी मानना है कि अच्छी घास के लिए ही ग्रामीण खुद आग लगाते हैं। इसके अलावा कई जगहों पर जलती बीड़ी, सिगरेट फेंक देने से भी वन आग से धधकते रहते हैं।