पिथौरागढ़। पर्यावरण में आ रहे बदलाव से हर कोई चिंतित है। पिथौरागढ़ में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने भी काव्य पाठ के जरिए धरती पर सूखा, अतिवृष्टि, दावाग्नि, सिकुड़ते वन आदि विषयों पर चिंता जताई।
काव्य गोष्ठी की शुरुआत करते हुए डॉ. आनंदी जोशी ने ‘लगी निरंतर ग्लेशियरों की बर्फ पिघलने, वन कानून में लगी आज दावाग्नि धधकने’, शिक्षक मथुरा दत्त चौंसाली ने ‘पत्थर दिखेंगे पेड़ न उगेंगे जब ये पेड़ कटेंगे, धूल भरी आधी दिखेंगी, बादल नहीं बरसेंगे’, डॉ. सरस्वती कोहली ने ‘क्यों हम रोक नहीं पाते धधकते जंगल, जलते पशुधन, विलख रहे हैं जंगल जलते पशुधन’, युवा कवि अशोक उप्रेती ने ‘दूषित है आज समाज देखो कुरीतियों की आड़ में, बड़ा दूषित सा नजारा है मानव के व्यवहार में’, अमित कश्यप ने ‘लगाओ पेड़, बचाओ पर्यावरण, मिल कर रोंके बढ़ता प्रदूषण’, भावना ने ‘बढ़ता वायु जल प्रदूषण पृथ्वी के हैं बड़े दुश्मन, कम ग्रीन गैस अधिक वृक्ष तभी सुरक्षित रहेगा जीवन’, डॉ.तारा सिंह ने ‘हमारी वसुंधरा हमारा जीवन, रोकना होगा इसका दोहन, प्रदूषित वातावरण एवं जल कैसे बचेगा हमारा कल’ कविता प्रस्तुत की।