धारचूला (पिथौरागढ़)। सीमांत धारचूला तहसील के दारमा को जोड़ने वाली सड़क बर्फबारी के कारण बंद है। व्यास घाटी को जाने वाला मार्ग नजंग से बूंदी तक बेहद खराब हालत में है। ऐसे में मई माह में उच्च हिमालयी क्षेत्र की ओर जाने वाले दोनों घाटियों के कई परिवार को परेशान होना पड़ सकता है।
दारमा के चौदह और व्यास घाटी के सात गांवों के लोग भेड़ बकरियों और अन्य जानवरों के साथ हर साल माइग्रेशन पर उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्थित अपने गांवों में जाते हैं। बर्फ पिघलने के बाद मई माह के प्रथम सप्ताह से माइग्रेशन शुरू हो जाता है। वहां पर जड़ी बूटी की खेती करने के बाद सितंबर माह में बर्फबारी से पहले घाटी की ओर लौट आते हैं। इस साल दारमा घाटी के गांवों को जाने वाली सड़क पर अब भी दो फीट बर्फ जमा है। इस समय भी यहां बर्फबारी हो रही है और इस कारण सड़क का जल्द खुलना संभव होता नहीं दिख रहा है। सड़क का जिम्मा कें द्रीय लोक निर्माण विभाग के पास है और मौसम के आगे विभाग भी बेबस नजर आ रहा है।
इसी तरह धारचूला से व्यास घाटी को जाने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। चीन सीमा तक के लिए सीमा सड़क संगठन कटिंग कर रहा है। क्षेत्र में सड़क निर्माण के कारण आवाजाही खतरे से खाली नहीं है। व्यास घाटी अभी पूरी तरह से सड़क से नहीं जुड़ी है। धारचूला से व्यास घाटी के गुंजी, गर्ब्यांग से लेकर कुटी गांव तक जाने वाले ग्रामीणों को लगभग 30 से 65 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करनी पड़ेगी। नजंग से बूंदी तक के मार्ग की हालत बेहद खराब है।
ये गांव हैं प्रभावित...
दारमा घाटी के गांव- दर, नांगलिंग, सेला, चल, बालिंग, दुग्तु, सोन, दांतु, बोन, फिलम, तिदांग, गो, मारछा, सीपू ।
धारचूला के व्यास घाटी के गांव- कुटी, नाभी, रोंगकांग, गुंजी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, बूंदी।
सीमांत जनपद की बंद सड़कों को खोलने को लेकर उपजिलाधिकारियों को संबंधित विभागों के साथ बैठक कर बातचीत करने को कहा गया है। कैलाश मानसरोवर यात्रा भी व्यास घाटी से संचालित होती है। इसको देखते हुए सड़कों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। शीघ्र ही सभी विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक कर सड़कों और पैदल मार्गों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।
-डा.विजय कुमार जोगदंडे
जिलाधिकारी पिथौरागढ़।