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आपदा प्रभावित क्षेत्र में पैदल रास्तों का निर्माण शुरू

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पिथौरागढ़। मालपा और मांगती के आपदा प्रभावित इलाकों में क्षतिग्रस्त पैदल रास्तों के निर्माण का काम शुरू हो गया है। नजंग नाले से मालपा तक पैदल रास्ता बनाने के काम में लोनिवि के मजदूर जुटे हैं। उधर, बूंदी से मालपा के बीच भी रास्ता बनाया जा रहा है। रविवार को भी मलबे में दबे लोगों की खोजबीन का काम जारी रहा, लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली।
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रविवार को हेलीकॉप्टर ने बूंदी एवं गुंजी के लिए कुल छह बार उड़ान भरी और 66 लोगों को धारचूला पहुंचाया गया। बूंदी और गुंजी के पैदल रास्ते टूटने के कारण हेलीकॉप्टर की व्यवस्था की गई है। कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले सभी यात्री पहले ही गुंजी पहुंचा दिए गए हैं।

जिला आपदा नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार खोजबीन का काम अभी जारी है। मालपा और मांगती में लापता लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। महाकाली के किनारे करीब 50 किलोमीटर दूर जौलजीबी तक लगातार खोजबीन अभियान चलाने के बाद भी कोई सफलता नहीं मिली है। उधर, मालपा से मिली जानकारी के अनुसार आपदा के बाद वहां पर दुकानें और पड़ाव पूरी तरह बंद हो गया है। मालपा में इस समय सिर्फ मलबे के ढेर हैं। अलबत्ता मांगती में मलबा हट चुका है और सड़क यातायात भी बहाल हो चुका है।
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इस बीच केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा ने आपदा राहत की समीक्षा के दौरान कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में संचार की सुविधा न होने के कारण ज्यादा कठिनाई का सामना करना पड़ा। ऐसे में विकल्प के तौर पर इन इलाकों में वायरलेस सेट लगाए जाएं। उन्होंने प्रभावित इलाकों में राशन की सप्लाई, पैदल रास्तों की मरम्मत और पेयजल योजनाओं की मरम्मत के निर्देश दिए। बैठक में डीएम सी रविशंकर, एडीएम मोहम्मद नासिर, सीडीओ आशीष चौहान समेत तमाम अधिकारी थे। इधर, जिलाधिकारी ने बताया कि अब मांगती और मालपा में लापता लोगों के मिलने की संभावना बहुत कम है। एक-दो दिन में खोजबीन का काम बंद करने का विचार किया जा सकता है।
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