धारचूला के सुमदुम में नदी के किनारे जान हथेली में रखकर आवागमन कर रहे युवा
- फोटो : अमर उजाला
दो जुलाई की अतिवृष्टि ने मुनस्यारी, बंगापानी, तेजम तहसील में जबर्दस्त तबाही मचाई है। धारचूला तहसील भी तबाही के मंजर से अछूता नहीं है। सड़क, पैदल रास्ते और पुल बहने से धारचूला के उमच्या ग्राम पंचायत के तोक सुमदुम, तेजम, वतन और कर्तो के 150 परिवार जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
जुलाई शुरुआत की अतिवृष्टि ने धारचूला से 60 किमी दूर सुमदुम के 80, तेजम के 30, कर्तो के 10 और वतन के 30 परिवारों को गहरे जख्म दिए हैं। सड़क के साथ ही पैदल रास्ते तहत-नहस हो गए। सोबला से तेजम जाने वाली सड़क सोबला से आगे बंद है। अतिवृष्टि से तेजम नाला और सुमदुम के पास बने पुल बह गए थे। सड़क क्षतिग्रस्त होने के कारण इस क्षेत्र के लोगों को हरदेवल से तेजम तक 15 किमी पैदल चलना पड़ रहा है, जबकि पुल बहने से इन गांवों के लोगों को तेजम नाला और भौरानीगाड़ के किनारे खतरनाक चट्टानों से होकर गुजरना पड़ रहा है।
खतरनाक चट्टानों में जरा सा संतुलन बिगड़ने पर जान पर बन सकती है। सुमदुम से 100 मीटर नीचे स्थित पुल बहने से लोगों की दिक्कतें और बढ़ गई हैं। सुमदुम से 150 मीटर आगे लोगों ने नदी में तार डाल रखा है, उसके सहारे लोग दर गांव होते हुए सोबला पहुंच रहे हैं। उन्हें चार किमी अतिरिक्त चलना पड़ा रहा है।
जानलेवा बना है सफर
कई मुसीबतों को झेलकर शुक्रवार को सुमदुम गांव से धारचूला आ रहे पिथौरागढ़ महाविद्यालय के छात्र प्रकाश दानू पुत्र प्रेम सिंह दानू, महेंद्र थापा पुत्र कुंवर सिंह थापा ने बताया कि तेजम से दर तक का सफर जानलेवा बना है। पुल बहने से नदी के किनारे खतरनाक चट्टानों से गुजरना पड़ रहा है। कहते हैं, सोबला-तेजम सड़क पर जल्द यातायात बहाल करने के साथ ही पैदल रास्तों की मरम्मत, पुलों का निर्माण होने तक ट्राली की व्यवस्था की जानी चाहिए।