डाक्टर और मास्टर की क्या बात करें, यहां तो उच्चाधिकारी भी रहना पसंद नहीं करते। यहां अफसरों की तैनाती ट्रिपल पी तक ही सिमट गई है। यानी पहली पोस्टिंग, प्रमोशन या पनिशमेंट। न्यूनतम तीन साल की तैनाती का नियम भी यहां बेमानी साबित होता है। राज्य बनने के बाद से 15 साल में पिथौरागढ़ में में 15 डीएम बदल दिए गए।
वर्ष 2000 में 28 मार्च से तारकेंद्र वैष्णव पिथौरागढ़ के डीएम थे। वह 3 सितंबर तक यहां कार्यरत रहे। 4 सितंबर 2001 से 7 नवंबर 2002 तक राजीव चंद्र जोशी, 8 नवंबर 2002 से 16 जून 2004 तक नवीन चंद्र शर्मा, 15 जून 2004 से 27 मार्च 2005 तक गोपालकृष्ण द्विवेदी, 31 मार्च 2005 से 24 मई 2007 तक अमित नेगी, 25 मई 2007 से 19 नवंबर 2007 तक कुणाल शर्मा, 21 नवंबर 2007 से 18 जून 2008 तक डी सेंथिल पांडियन, 20 जून 2008 से 21 जून 2009 तक बीएस गुंसाईं, 22 जून 2009 से 28 जून 2011 तक एनएस नेगी, 29 जून 2011 से 12 अक्तूबर 2011 तक एमसी जोशी, 18 अप्रैल 2012 से 25 मई 2013 तक सीएमएस बिष्ट, 27 मई 2013 से 25 फरवरी 2014 तक नीरज खैरवाल, 26 फरवरी 2014 से 15 जनवरी 2015 तक एचसी सेमवाल, 19 जनवरी 2015 से 2 नवंबर 2015 तक सुशील कुमार जिले के डीएम रहे। 3 नवंबर 2015 से अब तक एचसी सेमवाल डीएम हैं।