30 जून की रात और एक जुलाई को हुई भारी बारिश से सरकारी विभागों को करीब 15.50 करोड़ का नुकसान पहुंचा है। सभी विभागों ने क्षति का आकलन कर रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी है। सबसे ज्यादा नुकसान जल निगम की आवासीय कालोनी को हुआ। इसके आठ कक्ष खतरे से घिर गए। पांच कक्ष खाली करा दिए गए हैं।
विद्युत विभाग के ईई सीएस बसनेत ने बताया कि भारी बारिश से लाइन टूटने के कारण उनको 80 लाख रुपये का नुकसान झेलना पड़ा। लोनिवि के ईई पीसी जोशी ने बताया कि डीडीहाट डिवीजन में 23 सड़कें बंद हैं। विभाग को तीन करोड़ का नुकसान हुआ। जल निगम की तीन निर्माणाधीन ध्वस्त हुई और 90 लाख का नुकसान हुआ। जल निगम की आवासीय कालोनी अब रहने लायक नहीं है। जल निगम के ईई वीके कौशिक ने बताया कि नुकसान का आकलन कर दिया है। सिंचाई विभाग को 1.5 करोड़, लघु सिंचाई को एक करोड़ का नुकसान हुआ है। जल संस्थान की 27 ग्रामीण योजनाएं ध्वस्त हो गई।
जल संस्थान के ईई बिलाल यूनुस ने बताया कि विभाग को 1.3 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। नगर पंचायत को चार करोड़ का नुकसान हुआ है। नगर पंचायत के चारों वार्डों में पैदल रास्ते, नालियां, पार्क आदि ध्वस्त हो गए। लोदपट्टा, तहसील वार्ड, नई बस्ती, जीआईसी वार्ड, बुड़काफल, पमस्यारी रोड आदि में व्यापक क्षति हुई है। पीएमजीएसवाई को दो करोड़ और एडीबी को एक करोड़ का नुकसान हुआ है।
धूरा के मकानों को सड़क निर्माण से खतरा
पिथौरागढ़। जिला पंचायत क्षेत्र बीसाबजेड़ के ग्राम पंचायत अखूली के अंतर्गत धूरा तोक के मकानों को अतिवृष्टि से खतरा पैदा हो गया है। बीसाबजेड़ की जिला पंचायत सदस्य गोदावरी देवी ने बताया कि ग्राम पंचायत अखूली के मढ़मानले से धूर्चू तक सिंचाई निर्माण खंड सड़क निर्माण कार्य कर रहा है, जिस कारण तोक धूरा निवासियों के मकानों की भूमि अब धंसने लगी है। 30 जून को हुई अतिवृष्टि से मकानों को और भी ज्यादा खतरा हो गया है। जिला पंचायत सदस्य गोदावरी ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर सिंचाई निर्माण खंड से मकानों के आसपास सुरक्षा दीवार बनाने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने राजस्व और तकनीकी टीम तोक धूरा में भेजकर मकानों की जांच करने की मांग की है। कहा कि यदि जिला प्रशासन शीघ्र हरकत में नहीं आता है तो क्षेत्र के लोग बड़े हादसे का शिकार हो सकते हैं।
बेडो ग्राम के मकान खतरे की जद में
थल (पिथौरागढ़)। जिले में 30 जून को आई दैवी आपदा से ग्राम पंचायत हत्वाल के तोक गांव बेडो में भूस्खलन से राजेंद्र राम, किशन राम, गोविंद राम, हरीश राम, ललित राम, कैलाश राम के मकान खतरे की जद में आ गए हैं। इन लोगों की 35 नाली भूमि मलबा से पट गई है, जिसके कारण धान, मडु़वा, गहत, उड़द की खेती पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से भूमि लगातार धंस रही है। गांव बेडो के तीन मकानों की मिट्टी खिसकने से खतरा पैदा हो गया है। गांव के लोग अन्य जगह शरण लेने को मजबूर हैं। प्रशासन से कोई मदद न मिलने के कारण लोग हताश हैं।