पिथौरागढ़। सीमांत जिले के दर्जनों गांवों में पारंपरिक गीतों के साथ गौरा-महेश्वर का विवाह धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। गांवों में पंडितों ने दूर्वाष्टमी की कथा सुनाई। इस मौके पर महिलाओं ने गले में दूब धारण कर गौरा-महेश्वर के विग्रह की बिरुड़ों (पंचधान्य) से पूजा कर सुख-समृद्धि और संतति के कल्याण की कामना की।
सीमांत जिले में पंडितों के बीच मतभेद के चलते इस बार दूर्वाष्टमी का पर्व दो बार मनाया गया। अधिकांश जगहों पर सातूं-आठूं का पर्व 16-17 अगस्त को मनाया गया। वहीं जिले के दर्जनों गांवों और नेपाल में आठूं का पर्व सोमवार को धूमधाम के साथ संपन्न हुआ। व्रती महिलाओं ने सुबह खेतों से सौं घास लाकर उससे महेश्वर का विग्रह बनाया और उसे सजा कर गौरा के पास ले गए। बाद में पंडितों ने मंत्रोच्चार के बीच गौरा-महेश्वर का विवाह संपन्न कराया। रविवार की रात गांवों में झोड़ा-चांचरी, ठूल खेल आदि की धूम रही। सोमवार को नम आंखों के साथ परंपरागत नौले-धारों पर विग्रहों का विसर्जन किया गया। विषाड़ के पंडित दामोदर भट्ट ने बताया कि अगस्त्योदय 17 सितंबर को होगा।
झूलाघाट । नेपाल सीमा से सटे कानड़ी और खरक्यूड़ा गांवों में आठूं पर्व धूमधाम से मनाया गया। महाकाली नदी के किनारे कानड़ी के देवी मंदिर में दोपहर बाद से सीमू, बल्तड़ी, बनाड़ा, झूलाघाट और जुलगांव के लोग जुटने लगे थे। शाम चार बजे बाद मंदिर से गौरा, महेश की प्रतिमाओं के साथ महिलाओं और पुरुषों ने अलग-अलग टोलियों में कदम मिलाते हुए चांचरी लगाई। अमरूद, नीबू, माल्टा और बिरुड़ के साथ गौरा महेश की पूजा की गई। ग्राम प्रधान लक्ष्मण चंद, सूबेदार प्रेम चंद, टेक चंद, रमेश चंद, किशोर चंद, किशन सिंह खनका, भानी चंद, भरत चंद, किशन चंद ने मेले में स्तुति गीत गाए। मेले में शांति व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात था। कानड़ी गांव के लोग मंगलवार को नेपाल के त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में चैतोल पूजा के लिए जाएंगे।