पिथौरागढ़। साल भर पढ़ाई की मेहनत से जी चुराते रहे। परीक्षा हुई तो प्रश्नपत्र हल करना नहीं आया। आधी-अधूरी काफी में नीचे से लिख दिया ‘गुरुजी गरीब घर से हूं, आर्थिक स्थित बेहद कमजोर हैं। पिछले वर्ष भी फेल हो गई। इस बार जरूर पास कर देना, भगवान आपको खुश रखे’।
इन दिनों उत्तराखंड बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य किया जा रहा है। मूल्यांकन के दौरान चाय के ब्रेक पर बाहर आए शिक्षकों ने बताया कि कुछ उत्तर पुस्तिकाओं में कॉपी के अंत में अपील भी आ रही है। शिक्षकों ने बताया कि पिछले दो-तीन वर्ष पूर्व तो सौ-सौ रुपये के नोट भी कापियों के अंदर मिलते थे। इस बार रुपये तो नहीं मिल रहे हैं। अलबत्ता परीक्षा में पास कर देने के विनम्र अनुरोध आ रहे हैं।
जिला मुख्यालय के मिशन इंटर कॉलेज और केएनयू राइंका में मूल्यांकन कार्य हो रहा है। राइंका में राजनीति विज्ञान के शिक्षक ने बताया कि परीक्षा कॉपी में एक छात्रा ने लिखा था कि गुरुजी पिछले वर्ष भी फेल हो गई थी। घर की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर है। इस बार जरूर पास कर देना।
गुरुजी ने बताया कि अब चरणबद्ध और सतत मूल्यांकन होता है। बच्चों के लेखन कला पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है। उत्तर चरणबद्ध ढंग से सही है और अंत में गलत होता है तो भी नंबर दिए जाते हैं, जबकि पूर्व में ऐसा नहीं होता था। सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या कम होने से अब उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में भी दो की जगह एक ही टेबल लग रही है।