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धारचूला के दुग्तु गांव में स्यंसै महापूजा संपन्न

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पिथौरागढ़। धारचूला से 65 किमी दूर सीमांत के दारमा क्षेत्र के दुग्तू गांव में प्रत्येक चार वर्ष में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय स्यंसै महापूजन विधि विधान के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान पारंपरिक परिधान में स्वागत गीत गाए और छलिया नृत्य करते हुए मंदिर परिसर की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की।
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पूजा के पहले दिन रात्रि जागरण, दूसरे दिन आलम (पवित्र वृक्ष) को स्थापित किया गया। तीसरे दिन स्यंसै महापूजन आदि कार्यक्रम किए गए। पूजा के दूसरे दिन आलम (पवित्र वृक्ष) के लिए ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में चार किमी दूर बालिंग गांव से आलम, लाने के दौरान बालिंग गांव के लोगों ने आगंतुकों का स्वागत किया। आलम के साथ गांव पहुंचने पर महिला, पुरुष, बच्चों ने पारंपरिक परिधान में स्वागत गीत गाए। आलम दच्यो को देव स्थल में स्थापित करने के बाद लोगों ने छलिया नृत्य करते हुए मंदिर परिसर की परिक्रमा की। इस दौरान काफी संख्या में दांतू, सौन, बौन, सीपु, नागलिंग, फिलम गांव के लोगों ने स्यंसै देव के दर्शन किए। सामाजिक कार्यकर्ता सुंदर सिंह दुग्ताल ने बताया कि स्यंसै पूजन के दौरान गांव के 90 बेटियों, दामादों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान जीवन सिंह दुग्ताल द्वारा संपादित पत्रिका दुनजन (राखू़) का विमोचन गांव के बुजुर्गों ने किया। दुग्ताल ने बताया कि पत्रिका में दारमा घाटी के विभिन्न दर्शनीय स्थलों के बारे में जानकारी दी गई है। संचालन सोमी दुग्ताल, नारायण सिंह, गोपाल सिंह ने किया। इस अवसर पर भीम सिंह, जसवंत दुग्ताल, सेवानिवृत्त जिला जिला जज भूपेंद्र सिंह दुग्ताल, गजेंद्र दुग्ताल, ज्ञान सिंह, कृष्ण सिंह, नेत्र सिंह, डॉ. सुखदेव दुग्ताल, डॉ. महिमन दुग्ताल, डॉ. प्रियंका, प्रदीप, प्रमोद, प्रधान देवराम दुग्ताल, उपर सिंह आदि थे।

बुजुर्ग बेटी भागुली हुई भावुक
रं कल्याण संस्था के केंद्रीय महासचिव करन सिंह ग्वाल ने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को दुग्तू के लोगों ने सही मायने में अपनाया है। कार्यक्रम के दौरान गांव की सबसे बुजुर्ग बेटी भागुली दुग्ताल सीपाल (95) काफी समय बाद अपनों के बीच पहुंची। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि सड़क सुविधा के कारण ही आज वह उम्र के इस पड़ाव में गांव पहुंच अपनों से मिल सकीं।
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