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जिले के 118 सरकारी स्कूलों में पानी नहीं

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पिथौरागढ़। जिले के 118 सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को प्यास बुझाने के लिए पानी तक नहीं मिल पा रहा है। वर्षों बाद भी इन स्कूलों में पेयजल कनेक्शन नहीं लग सका है। नतीजतन विद्यार्थियों को पानी के लिए पढ़ाई छोड़कर इधर-उधर भटकना पड़ता है।
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सर्वशिक्षा अभियान और रमसा जैसी परियोजनाओं में करोड़ों खर्च के बाद भी सरकारी शिक्षा की हालत नहीं सुधरी है। स्थिति यह है कि जिले में 91 प्राथमिक, 17 इंटर कॉलेज और 10 हाइस्कूल में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। इन स्कूलों में स्थापना के वर्षों बाद भी पेयजल की व्यवस्था नहीं हो पाई है।

इससे छात्रों के सामने स्कूल में पेयजल की विकट समस्या खड़ी है। मध्यान्ह का सारा वक्त पानी के इंतजाम में खर्च हो रहा है। पेयजल के लिए आसपास के गांव और जलस्रोतों की शरण लेनी पड़ रही है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
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पानी न होने से शौचालय बने शोपीस
इन स्कूलों में पेयजल कनेक्शन न होने से शौचालय शोपीस बने हैं। इससे स्कूलों में छात्रों को परेशानी उठानी पड़ती है। खासकर छात्राओं को ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।

बस्ते के साथ ढोना पड़ रहा पानी
स्कूलों में पेयजल के अभाव के बीच विद्यार्थियों को घर से बस्ते के साथ पानी भी ढोना पड़ रहा है। इससे कापी, किताबें भीगकर खराब होने की आशंका भी बनी रहती है। पानी ढोते वक्त कुछ छात्रों की कापी, किताबें भीगकर खराब हो चुकी हैं, लेकिन पानी ढोना छात्रों की मजबूरी बन गया है।

इन स्कूलों के आसपास कोई जलस्रोत न होने से कनेक्शन नहीं लिए जा सके हैं। पेयजल विहीन विद्यालयों में पानी पहुंचाने के लिए जल संस्थान के साथ मिलकर योजनाएं बनाई जा रही हैं। इस वित्तीय वर्ष में कई स्कूलों में पानी के कनेक्शन लग जाएंगे। -डॉ. वीपी सिमल्टी, मुख्य शिक्षा अधिकारी, पिथौरागढ़
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