डीडीहाट (पिथौरागढ़)। जंगलों में बेकार पड़े रहने वाले एवं गर्मियों में प्रचंड आग का कारण बनने वाले पिरूल से अब तारपीन और डीजल तैयार होगा। आईआईटी रुड़की की मदद से जल्द ही यहां पर पिरूल से तारपीन और डीजल बनाने वाली इकाई स्थापित होगी। जंगलों से पिरूल एकत्र कर लाने वालों से पांच रुपये प्रति किलो के हिसाब से इसे खरीदा जाएगा। गेल इंडिया इस इकाई को स्थापित करने में सहयोग देगी।
विधायक विशन सिंह चुफाल ने बताया कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पिरूल पर आधारित इकाई स्थापित करने को मंजूरी दे दी है। डीडीहाट विकासखंड में 60 फीसदी जंगल चीड़ के हैं। चीड़ की पत्तियां (पिरूल) के गिरने से हर साल गर्मियों में प्रचंड आग लगती है। पिरूल भूकटाव का कारण भी बनते हैं। नालों में पिरूल अटकने पर पानी का प्रवाह थम जाता है। पिरूल का अन्य कोई उपयोग नहीं होता।
विधायक ने बताया कि पिरूल पर आधारित डीडीहाट में पहली और सबसे बड़ी इकाई लगेगी। इस इकाई को स्थापित करने लिए आईआईटी की ओर से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। जिन जंगलों में पिरूल ज्यादा मात्रा में मिलता है, उसी के आसपास इस इकाई को स्थापित किया जाएगा। विधायक ने बताया कि तारपीन और डीजल की मांग बहुत अधिक है।
यदि यह प्रयोग सफल हो जाता है तो रोजगार के नए द्वार खुलेंगे और पिरूल से होने वाले नुकसान को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पिरूल पर आधारित इकाई की स्थापना के लिए गहरी रुचि दिखाई है और डीडीहाट का ही चयन किया है। विधायक के अनुसार वह अपने स्तर से इस इकाई को जल्दी स्थापित करने का प्रयास करेंगे।