पिथौरागढ़/अस्कोट/झूलाघाट। मोस्टामानू की रामलीला में सीता स्वयंवर और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन किया गया। मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष जगत सिंह खाती थे। अस्कोट की रामलीला में सूर्पणखा के नाक, कान काटने और खर-दूषण वध की लीला का मंचन किया गया। अस्कोट की रामलीला में मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख प्रशांत भंडारी थे। वहीं, झूलाघाट की रामलीला का राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा ने उद्घाटन किया। बांस में रामलीला जारी है।
मोस्टामानू की रामलीला में सीता स्वयंवर में आए राजा शिव धनुष को तोड़ नहीं पाते। स्वयंवर में आए लंकापति रावण और पाताल के राजा वाणासुर में संवाद होता है। मुनि विश्वामित्र की आज्ञा पाकर राम शिव धनुष तोड़ देते हैं। सीता भगवान राम के गले में वरमाला डाल देती हैं। धनुष टूटने के बाद परशुराम राज दरबार पहुंचकर धनुष तोड़ने पर नाराजगी जताते हैं। भगवान राम और परशुराम का संवाद होता है।
लक्ष्मण कहते हैं-काहे रिस होत पिनाक पुराना, ऐसे धनुष बहुत हम तोड़े, कबहूं न अस रिस कीन्हा। क्रोधित होकर परशुराम कहते हैं-बालक छोटा बड़ा है खोटा, ढोटा है नादान। परशुराम भगवान राम को पहचान जाते हैं और अपना धनुष राम को सौंपकर हिमालय को प्रस्थान कर जाते हैं। रामलीला कमेटी के संरक्षक दीपक लुंठी, अध्यक्ष दीवान सिंह वल्दिया, उपाध्यक्ष मनोज बिष्ट, सचिव एनडी कांडपाल आदि ने मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष खाती को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया।
अस्कोट की रामलीला में मुख्य अतिथि ब्लॉक प्रमुख प्रशांत भंडारी ने मंच के सुंदरीकरण के लिए एक लाख रुपये देने की घोषणा की। झूलाघाट की रामलीला में नटी-सूत्रधार नाटक का मंचन किया गया। रामजन्म के साथ ही रावण, विभीषण, कुंभकरण के तपस्या करने का मंचन हुआ। मुख्य अतिथि राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा ने मंच निर्माण के लिए सांसद निधि से तीन लाख रुपये देने की घोषणा की। इस दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत, सांसद प्रतिनिधि जगत महर, खीमराज जोशी, नीरज जोशी, शंकर खड़ायत मौजूद थे। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष कैलाश जोशी ने सभी का आभार जताया।