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दाखिम जूनियर हाईस्कूल से 19 बच्चों ने कटाया नाम

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पिथौरागढ़। विकासखंड मुनस्यारी के दूरस्थ राजकीय जूनियर हाइस्कूल दाखिम से इस बार 19 विद्यार्थियों ने एक साथ नाम कटा लिया है और विद्यार्थी अन्य विद्यालयों में प्रवेश ले चुके हैं। पहले विद्यालय में छात्रसंख्या 30 थी, जो अब मात्र 11 रह गई है। अब विद्यालय के बंद होने का खतरा पैदा हो रहा है, क्योंकि यदि सरकार कम छात्रसंख्या वाले विद्यालयों को बंद करने का फैसला लेती है तो दाखिम पर भी उसका असर पड़ेगा। अभिभावक इस स्थिति से खासे चिंतित हैं और मुख्य शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन देकर कहा कि विद्यालय में शिक्षकों की तैनाती की जाए और नाम कटाने वाले विद्यार्थियों को रोकने के लिए कदम उठाए जाएं।
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दाखिम के प्रधान गोविंद सिंह, स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नारायण सिंह, भाजपा नेता जगत मर्तोलिया ने मुख्य शिक्षा अधिकारी जीपी कोहली को बताया कि विद्यालय में शिक्षक न होने के कारण ही यह स्थिति सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि कई संपन्न परिवारों के लोग अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए शहरों और कस्बों में चले गए हैं। गांव के खाली होने के पीछे शिक्षा की अव्यवस्था मुख्य कारण है।

उन्होंने विद्यालय में तैनात एकमात्र शिक्षक की लापरवाही की भी शिकायत की है। कहा है कि शिक्षक अक्सर अवकाश पर रहता है। मुख्य शिक्षा अधिकारी ने आश्वासन दिया कि शिक्षकों के रिक्त पद भरे जाएंगे और तैनात शिक्षक के क्रियाकलापों की जांच की जाएगी। अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं आया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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पदोन्नति के बाद भी शिक्षक नहीं मिले
राजकीय जूनियर हाइस्कूल डोकला में पदोन्नति के बाद भी शिक्षकों की तैनाती नहीं हुई है। इससे क्षेत्र के लोगों में खासा रोष है। कोटा के प्रधान वीरेंद्र सिंह सुयाल ने बताया कि 1 अगस्त को प्राथमिक एवं जूनियर हाइस्कूल के शिक्षकों की पदोन्नति के लिए काउंसलिंग जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) कार्यालय पिथौरागढ़ में कराई गई थी। पदोन्नति के लिए जूनियर हाइस्कूल में विज्ञान वर्ग के 12, सामाजिक विज्ञान के 25 और भाषा के 24 शिक्षकों को पदोन्नति के लिए बुलाया गया था, इसमें से मुनस्यारी के एक भी जूनियर हाइस्कूल में शिक्षकों की तैनाती नही की गई। आरोप है कि शिक्षा क्षेत्र में बनी नियमावली उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के पक्ष में कतई नहीं है, इसका खामियाजा दुर्गम क्षेत्र के विद्यालयों में पढ़ रहे छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
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