फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

माइग्रेशन से लौटने के लिए अब नेपाल का ध्वस्त रास्ता बना चुनौती

विज्ञापन
विज्ञापन
धारचूला (पिथौरागढ़)। धारचूला के उच्च हिमालयी गांवों में माइग्रेशन पर गए परिवारों के लिए अब नेपाल का ध्वस्त रास्ता चुनौती बन गया है। पुल बनने के बावजूद अगले तीन-चार दिनों तक आवाजाही शुरू होने की संभावना नहीं है।
विज्ञापन


धारचूला के लगभग दो हजार परिवार हर साल माइग्रेशन पर व्यास घाटी के गांवों में जाते हैं। इस साल मार्ग ध्वस्त होने और पुलों के बहने के कारण ग्रामीणों की आवाजाही के लिए सुरक्षित मार्ग नहीं है। लखनपुर से नजंग तक मार्ग खस्ताहाल है। इसे देखते हुए माइग्रेशन पर गए पशुपालकों के लौटने के लिए नजंग से महाकाली नदी में पुल का निर्माण किया जा रहा है। माइग्रेशन वाले परिवार नजंग पुल से नेपाल में प्रवेश करने के बाद लगभग दो किमी नेपाल में चलकर लखनपुर में भारत में प्रवेश करेंगे। पुल बनकर लगभग तैयार हो गया है।

माना जा रहा था कि इस पुल से सोमवार तक आवाजाही शुरू हो जाएगी, लेकिन बताया जा रहा है कि नेपाल में भी दो किलोमीटर पैदल रास्ते की हालत बेहद खराब है। इस मार्ग को बनाने में भी तीन-चार दिन का समय लग सकता है। ऐसे में फिलहाल माइग्रेशन पर गए लोगों को राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
विज्ञापन


उधर, माइग्रेशन पर गए सात गांवों के लोग राशन एवं अन्य जरूरी सामान की कमी से भी जूझ रहे हैं, जबकि प्रशासन ने हाईकोर्ट के निर्देश पर एक बार हेलीकॉप्टर से खाद्यान्न सामग्री भेजने के बाद दोबारा सामग्री भेजने को लेकर कोई पहल नहीं की है। इसे लेकर सीमांत के लोगों में नाराजगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें