धारचूला (पिथौरागढ़)। धारचूला के नजंग में भारत और नेपाल को जोड़ने वाला पुल दो दिन में बनकर तैयार हो जाएगा। यह पुल घोड़ों के चलने लायक भी बन जाएगा। महाकाली नदी में पुल बनने से उच्च हिमालयी क्षेत्र में फंसे भेड़पालक नेपाल के रास्ते घर वापसी कर सकेंगे। एसडीएम पिछले तीन दिनों से स्वयं पुल पर नजर रखे हुए हैं।
व्यास घाटी को जोड़ने वाले कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग आपदा काल में पूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। चीन सीमा के लिए बन रही सड़क के निर्माण के कारण पैदल चलने लायक मार्ग नहीं है। लखनपुर से नजंग तक मार्ग में खतरे ही खतरे हैं। पैदल पुलों के बहने और रास्ता ध्वस्त होने से उच्च हिमालयी गांवों में माइग्रेशन पर गए ग्रामीण और भेड़पालक लौट नहीं पा रहे हैं। जबकि उच्च हिमालयी क्षेत्र में हिमपात शुरू हो गया है। स्थिति की जानकारी के बाद हरकत में आई सरकार ने माइग्रेशन पर गए लोगों की वापसी के लिए प्रशासन को जल्दी पुल का निर्माण करने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद नजंग में भारत और नेपाल को जोड़ने के लिए लकड़ी का पुल बनाया जा रहा है। पिछले तीन दिनों से नजंग में बन रहे लकड़ी के पुल पर एसडीएम आरके पांडेय नजर रखे हुए हैं। पुल के दो दिन के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। पुल तैयार होते ही लोगों के साथ ही इस पुल से घोड़ों और भेड़ों को नेपाल में ले जाया जाएगा। नेपाल में लगभग दो किमी सुरक्षित रास्ते में चलने के बाद लखनपुर नामक स्थान पर भारत में प्रवेश करेंगे।
उधर माइग्रेशन वाले गुंजी, गर्ब्यांग सहित अन्य सात गांवों में हेलीकाप्टर से पहुंचाए गए राशन का भी वितरण शुरू हो गया है। धारचूला में कार्यरत सहायक खाद्य निरीक्षक पुष्कर बोनाल ने बताया कि बृहस्पतिवार को गुंजी गांव में ग्रामीणों को खाद्यान्न सहित अन्य जरूरी सामान की बिक्री की गई।