फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीमांत के 13 गांवों के 149 परिवारों को पुनर्वास का इंतजार

विज्ञापन
विज्ञापन
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में बादल फटने और भूस्खलन की घटनाएं होती रहती हैं। दैवी आपदा के बाद गांवों के पुनर्वास का भरोसा तो दिलाया जाता है, लेकिन बाद में स्थिति ढाक के तीन पात की हो जाती है। वर्ष 2011 की पुनर्वास नीति के अंतर्गत जिले के 13 गांवों के 149 परिवारों को अत्यधिक संवेदनशील श्रेणी में रखा गया, लेकिन अब तक इनके विस्थापन के लिए भूमि का चयन नहीं किया। आपदा की स्थिति में लोग डरे-सहमे रहते हैं।
विज्ञापन


वर्ष 2013 की भीषण आपदा के बावजूद हमारी सरकारों ने खास सबक नहीं लिया। आपदा का दौर थमने के बाद संवेदनशील गांवों की भी कोई सुध नहीं ली जाती है। मुनस्यारी, बंगापानी, धारचूला के संवेदनशील गांवों के पुनर्वास के लिए राजस्व विभाग की ओर से अब तक भूमि का चयन भी नहीं किया गया है। आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से बताया गया है कि कुछ गांवों में भूगर्भीय सर्वेक्षण वर्ष 2016-17 के अनुसार संबंधित राजस्व विभाग की ओर से पुनर्वास के लिए प्रस्तावित भूमि की उपलब्धता अपर्याप्त बताई गई है।

मुनस्यारी के साइपोलो, सांईभाट के 10 आवासीय भवन अति संवेदनशील हैं। बावजूद इसके उन्हें सुरक्षित स्थान पर बसाने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। मुनस्यारी, धारचूला में हुई पहली ही बारिश ने तबाही मचानी शुरू कर दी है। ऐसे में रात में बादलों की गर्जना से ही लोग दहशत में आ जाते हैं। आपदा प्रबंधन अधिकारी आरएस राणा का कहना है कि पुनर्वास के लिए कई गांवों में जमीन की उपलब्धता नहीं है। भूगर्भीय दृष्टि से सुरक्षित जमीन की तलाश की जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


गांव परिवार जिनका विस्थापन होना है
कुलथम 15
सैनर 21
जिप्ती तोक रक्षाताल 05
तांकुल तोक मांगती 16
नई बस्ती नाचनी 07
साणा 06
तोमिल तोक झापुली 04
खुमती तोक कटौचिया 11
कनार टोयला 05
सांईपोलो, सांईभाट 10
गोल्फा नार्थिंग 15
न्यू सुआ तोक खिमसुवा 19
झिमर गांव 15
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें