डीडीहाट (पिथौरागढ़)। पर्यटक आवासगृह में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में महिलाओं को पारंपरिक खेती और जैविक खेती से जोड़ने की जानकारी दी गई। कहा गया कि जमीन में रसायनिकों के प्रयोग से उर्वरा शक्ति कम हो जाती है, जबकि जैविक खादों के उपयोग से लंबे समय तक जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहती है। कहा गया कि यदि महिलाएं परंपरागत कृषि पर ध्यान दें तो इससे उनकी आमदनी भी बढ़ने लगेगी।
पारंपरिक खेती के बारे में बताया गया कि कई उत्पाद ऐसे हैं जिनको अब बोया नहीं जाता। मडुवा, मादिरा समेत अन्य प्रकार की पुरानी फसलों को फिर से बोया जाए और इनकी बाजार में मांग भी बहुत अधिक है। खेतों में रसायनिक खादों के बजाय गोबर और पत्तियों की खाद का प्रयोग किया जाए।
ओरकल संस्था के सहयोग से अर्पण संस्था ने यह प्रशिक्षण आयोजित किया। मुख्य प्रशिक्षक रितु सौगनी ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को खेती के लिए नए तरीकों का प्रयोग करना चाहिए। अर्पण संस्था की समन्वयक खीमा जेठी ने पारंपरिक खेती के उपायों पर चर्चा की। इस मौके पर विभिन्न ग्राम सभाओं की 30 महिलाओं ने भाग लिया।