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थल ब्लॉक का अस्तित्व 55 वर्ष पहले समाप्त हो गया

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थल (पिथौरागढ़)। पिथौरागढ़ जिले का थल कस्बा सबसे पुराना है। थल में 16वीं सदी का शिव मंदिर है। इस मंदिर में अतीतकाल से मेले लगते आ रहे हैं। थल में 1955 अल्मोड़ा से सड़क पहुंची और 1957 में तत्कालीन यूपी सरकार ने थल में विकासखंड कार्यालय खोल दिया।
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इस विकासखंड के अधीन 600 गांव आते थे। 1962 तक थल में विकासखंड का कामकाज चलता रहा, लेकिन अचानक सरकार ने विकासखंड कार्यालय बंद कर दिया और थल विकासखंड में आने वाले गांवों को डीडीहाट, बेड़ीनाग विकासखंड में बांट दिया। अब भी यही व्यवस्था चली आ रही है।

थल के लोगों का कहना है कि 2014 में थल को तहसील का दर्जा तो मिल गया, लेकिन विकासखंड को लेकर चली आ रही विसंगति दूर नहीं की। अब लोग चाहते हैं कि थल को फिर से विकासखंड का दर्जा मिलना चाहिए। साथ ही किस आधार पर इसे 1957 में विकासखंड का दर्जा मिला था, उन अभिलेखों की पड़ताल की जानी चाहिए। लोगों का तर्क है कि यदि थल को विकासखंड का दर्जा मिल जाता तो गांवों तक विकास की किरण पहुंच जाती और काम करने में आसानी होती।
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ब्लॉक मुख्यालय शीघ्र खोला जाए
थल के समाजसेवी राम सिंह जंगपांगी का कहना है कि थल को शीघ्र ब्लॉक का दर्जा दिया जाना चाहिए। वह कहते हैं कि तहसील से पहले यहां पर विकासखंड कार्यालय खुलना चाहिए था। इतने बड़े इलाके के विकास में ब्लॉक की भूमिका अहम होगी। इसके लिए क्षेत्र के लोग प्रयास शुरू करेंगे और जरूरत पड़ने पर आंदोलन भी करेंगे।

सरकार को इस मामले में ध्यान देना चाहिए
थल निवासी उमेद सिंह देउपा का कहना है कि हर सरकार विकास की बात करती है, लेकिन विकास के प्रमुख इकाइयों को स्थापित करने पर ध्यान नहीं देती। यदि सरकार केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय को ठोस प्रस्ताव बनाकर भेजे तो जरूर सफलता मिल जाती। अब सरकार की इच्छाशक्ति पर ही निर्भर करेगा कि वह इस दिशा में कैसा कदम उठाती है।
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