पिथौरागढ़। सीमांत जिले में प्रसव के दौरान अप्रैल 2023 से अब तक 12 नवजात की मौत हुई है। नवजातों की मौत के पीछे का मुख्य कारण समय से पहले प्रसव और कमजोरी बताई जा रही है।
सीमांत जिला स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्रों में बाकी अन्य जिलों से काफी पिछड़ा हुआ है। पिथौरागढ़ में आए दिन प्रसव के दौरान जच्चा, बच्चे की मौत के मामले आते रहते हैं। नवजातों की मौत के पीछे का मुख्य कारण समय से पूर्व प्रसव होना, गर्भावस्था में शिशु के ठीक से विकसित नहीं होने, गर्दन में नाल के लिपटने आदि कारण बताए जा रहे हैं।
गर्भवती को गर्भावस्था में पेट में पल रहे नवजात का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। महिलाओं को समय-समय पर अल्ट्रासाउंड और टीकाकरण कराने के साथ ही आशा, एएनएम और चिकित्सकों से परेशानी होने पर सलाह लेने की आवश्यकता है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. जेएस नबियाल का कहना है कि अस्पताल में प्रसव को आई महिलाओं और नवजात का विशेष ध्यान रखा जाता है। कई नवजातों को सांस लेने में दिक्क्त, दूध न पीने, नाल के गर्दन में लिपटने आदि से मौत हो सकती है। अस्पताल प्रबंधन पूरी ईमानदारी से कार्य कर रहे हैं।
महिला अस्पताल में फिर एक नवजात की मौत
पिथौरागढ़। जिला महिला अस्पताल में एक दिन पूर्व प्रसव के दौरान एक नवजात की मौत हुई है। बताया जा रहा है कि बुंगाछीना निवासी दीक्षा भट्ट पत्नी मुकेश भट्ट का मंगलवार को सामान्य प्रसव हुआ था। प्रसव के बाद नवजात की मौत हो गई थी। नवजात की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाए। संवाद
नाल फंसी तो सिजेरियन सुरक्षित
पिथौरागढ़। जिला महिला अस्पताल की चिकित्सक डॉ. प्रेमा फकलियाल का कहना है कि अगर अल्ट्रासाउंड के दौरान पता लग जाए तो गर्भावस्था में बच्चे के गले में नाल लिपटी हुई है तो ऐसी महिलाओं के लिए सिजेरियन प्रसव सुरक्षित माना जाता है। कभी-कभी प्रसव के बाद नवजात की सांस की नली में गंदा पानी जाने से भी मौत हो जाती है। संवाद