पिथौरागढ़। गंगोलीहाट विकास खंड की ग्राम पंचायत जरमाल गांव के तोक कनारा में आज भी लोग करीब चार किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई को तय कर सड़क तक पहुंचते हैं। बरसात में इनके लिए यह दूरी तय करना और भी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इस गांव के बच्चे भी पढ़ने के लिए हर रोज करीब सात किलोमीटर पैदल चलकर विद्यालय पहुंचते हैं।
गांव की आबादी करीब डेढ़ सौ है। पूर्व में भाजपा विधायक जोगा राम टम्टा ने सड़क की घोषणा की थी। इसके बाद कांग्रेस शासनकाल में भी सड़क के लिए कुछ नहीं हुआ। बाद में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़क स्वीकृत हुई। इसकी डीपीआर भी बनी है लेकिन वन भूमि का पेच आड़े आ गया।
सड़क नहीं होने के चलते ग्रामीणों को रोगी को चार किमी की खड़ी चढ़ाई पार करते हुए जरमाल गांव तक सड़क पर लाना पड़ता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोहे की डोली तो ग्रामीणों को मिली है लेकिन खड़ी चढ़ाई में उस पर मरीज को ढोना टेड़ी खीर है। ग्रामीणों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया। ग्रामीण दो मजबूत डंडों के बीच कुर्सी को बांधते हैं और उस पर मरीज को बिठाकर सड़क तक पहुंचाते हैं। बच्चों को भी प्राथमिक शिक्षा के बाद आगे की पढ़ाई के लिए करीब सात किमी दूर राइंका भूलीगांव आना पड़ता है। गर्म घाटी होने के चलते क्षेत्र में आम, केला, अमरूद भी पर्याप्त मात्रा में होता है लेकिन ग्रामीणों को इनसे आर्थिक लाभ नहीं मिल पाता है। गांव के युवा पुष्पेंद्र सिंह भंडारी का कहना है कि गांव को लंबे समय से सड़क का इंतजार है।