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साहसिक खेलों को आगे बढ़ाएंगे लवराज

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दिनेश अवस्थी
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पिथौरागढ़। सातवीं बार सागरमाथा का माथा चूमकर लौटे पद्मश्री लवराज धर्मशक्तू के इरादे बुलंद हैं। उनके मन में आठवीं बार भी एवरेस्ट फतह करने का जज्बा बना हुआ है। लवराज का लक्ष्य साहसिक खेलों को बढ़ावा देने का है, जिससे उत्तराखंड में पर्यटन बढ़े और स्थानीय युवाओं को स्वरोजगार मिल सके।
बृहस्पतिवार को अपने सम्मान समारोह में पहुंचे बीएसएफ में बतौर सहायक कमांडेंट लवराज धर्मशक्तू ने बताया कि उन्होंने अब तक 53 बार देश-विदेश की विभिन्न चोटियों पर चढ़ने का प्रयास किया। इनमें से 30 में वह सफल रहे। पर्वतारोहण के दौरान उन्होंने देश के साथ ही यूरोप, चीन, नेपाल की चोटियां फतह कीं। उच्च हिमालयी क्षेत्र में फैले कूड़े-कचरे से वह व्यथित हुए। एवरेस्ट पर 2009 में उन्होंने पहली बार कूड़ा-कचरा साफ किया। पिछले वर्ष एवरेस्ट के बेस कैंपों से 1500 किलो कूड़ा उठाया गया। इस वर्ष बीएसएफ की टीम ने 700 किलो कूड़ा-कचरा उठाया। नेेपाल सरकार ने इसमें मदद की। हैलीकाप्टर के जरिये कूड़े को काठमांडू लाकर वहां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सौंपा गया।
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बकौल लवराज हिमालय को स्वच्छ रखने की जिम्मेदारी हर पर्वतारोही को उठानी चाहिए। बीएसएफ की टीम ने साथ ले गए शौचालयों को भी वापस लाकर अन्य पर्वतारोहियों के लिए मिसाल पेश की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थित विषम है। यहां मई में भी बादल फटने की घटनाएं होती हैं। उनका मानना है कि साहसिक खेलों से पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही आपदाओं से निपटने में सहायता मिल सकती है। प्रदेश में कई नदियां, ऊंचे पहाड़ और ट्रैकिंग रूट हैं, जिनसे पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। लवराज भविष्य में साहसिक खेलों के जरिये सीमांत के युवाओं को रोजगार से जोड़ना चाहते हैं।
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