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गुणवता को लेकर पहले भी उठे थे सवाल

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पिथौरागढ़। आंवलाघाट योजना के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर कांग्रेस सरकार के समय भी सवाल उठे थे। तब विपक्षी भाजपा ने निर्माण में अनियमितताओं का मामला उठाया था। अब भाजपा सरकार के समय में गुणवत्ता में अनियमितता का जिन्न सामने आ गया है।
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वर्ष 2014 में तत्कालीन विधायक मयूख महर 76 करोड़ रुपये से अधिक की आंवलाघाट योजना को लेकर अपनी ही सरकार के खिलाफ अनशन पर बैठ गए थे। इसके बाद योजना के लिए बजट जारी हुआ। निर्माण शुरू होने के बाद भाजपा ने गुणवत्ता पर सवाल उठाने शुरू कर दिए थे। भाजपा ने योजना के लिए अहम लिफ्ट योजना, सड़क निर्माण आदि को छोड़कर पहले ही नगर के आसपास टैंक निर्माण और लाइनें बिछाने का विरोध किया था। इसके साथ ही योजना की गुणवत्ता पर ध्यान न देने का आरोप लगाया था।

खुद पेयजल मंत्री प्रकाश पंत इसकी तस्दीक करते हैं। मंत्री का कहना है कि निर्माण शुरू होते ही अनियमितताओं की शिकायतें मिलने लगी थी। विपक्षी भाजपा ने प्रशासन और कार्यदायी संस्था का ध्यान इस ओर दिलाया था। सरकार में आने के बाद उन्होंने अधूरी छोड़ी गई योजना को आगे बढ़ाया। योजना को शीर्ष प्राथमिकता में रखकर पूरा बजट दिलाया। निर्माण कार्यों की समय-समय पर समीक्षा की। पेयजल मंत्री ने निवर्तमान सरकार पर गुणवत्ता से समझौता करने की तोहमत मढ़ी है।
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थर्ड पार्टी जांच से कार्यदायी संस्था में खलबली
आंवलाघाट योजना की थर्ड पार्टी जांच से कार्यदायी संस्था जल निगम के अभियंताओं में खलबली मची है। कार्यदायी संस्था के अधिकारी अंदरखाने बचाव की जुगत में जुट गए हैं। इसके तहत निर्माण की तकनीकी खामियों को परखने के साथ ही सुधार को लेकर माथापच्ची की जा रही है। जल निगम लीक टैंक की मरम्मत की संभावना भी टटोल रहा है। पेयजल मंत्री के थर्ड पार्टी जांच के आदेश के बाद जल निगम निर्माणाधीन योजना के कार्यों को लेकर फूंक-फूंककर कदम रख रहा है।
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