पिथौरागढ़। भारत सरकार की अति महत्वाकांक्षी निशुल्क स्वास्थ्य जांच योजना को उत्तराखंड स्वास्थ्य महानिदेशालय ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल तो कर लिया लेकिन जरूरतमंदों को इस योजना का आशातीत लाभ नहीं मिल पा रहा है। केंद्र स्तर पर योजना की समीक्षा के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने राज्य में जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। स्वास्थ्य महानिदेशालय से राज्य में योजना के क्रियान्वयन का प्रमाण भी तलब किया है।
केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राज्य भर में निशुल्क जांच योजना संचालित कर रही है। उत्तराखंड में वर्ष 2016 में इस योजना को मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल कर लिया गया था। यहां सीएम स्वास्थ्य बीमा योजना के जरिये निशुल्क जांच का प्रावधान किया गया है। योजना के तहत जरूरतमंदों को जिला, बेस अस्पताल में 30, जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर 28 निशुल्क स्वास्थ्य जांच सुविधा दी जानी है।
पिछले दिनों स्वास्थ्य मंत्रालय स्तर पर राज्य में योजना क्रियान्वयन की समीक्षा हुई थी। समीक्षा में पाया गया कि जरूरतमंदों को योजना का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। समीक्षा के बाद मिशन ने महानिदेशालय से योजना के संबंध में जांच रिपोर्ट तलब की है। महानिदेशालय से राज्य में अस्पतालवार योजना के क्रियान्वयन के लिए निर्धारित जांचों की सूची, अस्पताल द्वारा दी जा रही सुविधा और जांच नहीं होने का कारण भी स्पष्ट करने को कहा है।
राज्य में आंशिक रूप से चल रही योजना
केंद्रीय मंत्रालय की समीक्षा में पाया गया कि राज्य में यह योजना बेस, जिला एवं संयुक्त अस्पतालों में आंशिक रूप से ही संचालित हो रही है। योजना के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी निशुल्क जांच की जानी है, लेकिन निचले स्तर पर योजना संचालित ही नहीं हो रही है।
निदेशक ने तलब की जानकारी
निशुल्क जांच योजना के संबंध में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जांच रिपोर्ट तलब करने के बाद महानिदेशालय ने सभी जिलों के सीएमओ और अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों से निर्धारित प्रारूप पर सूचनाएं मांगी हैं। इस संबंध में निदेशक टीसी पंत ने जिलों को पत्र जारी किए हैं।
राज्य में योजना आंशिक रूप से ही संचालित हो रही है। इससे सभी जरूरतमंदों को योजना का आशातीत लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य महानिदेशालय से योजना के क्रियान्वयन की स्थिति और निशुल्क जांच के अनुपालन के संबंध में जांच रिपोर्ट मांगी है। -युगल किशोर, निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड