थल (पिथौरागढ़)। थल का औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) पांच साल पूर्व खुल गया था। तब से आईटीआई की कक्षाएं सिंचाई विभाग के जर्जर भवन में संचालित हो रही हैं। आईटीआई का भवन बनाने के लिए विभाग ने जमीन की तलाश की और निकटवर्ती कौली गांव के लोगों ने अपनी 25 नाली जमीन आईटीआई का भवन बनाने के लिए दान में दे थी, लेकिन विभाग अब तक भवन का निर्माण नहीं कर पाया है।
थल में खुले आईटीआई में मात्र सिलाई और इलेक्ट्रिक ट्रेड चल रहे हैं और वर्तमान में इसमें सिर्फ 18 छात्रों ने प्रवेश ले रखा है। युवाओं का कहना है कि इन दोनों ट्रेड में रोजगार की संभावनाएं लगातार कम हो रही हैं। यदि वर्तमान की जरूरत के हिसाब से ट्रेड खोले जाते तो युवाओं को लाभ मिलता और छात्र संख्या भी बढ़ती। दूसरा जिस भवन में आईटीआई का संचालन हो रहा है, वह जर्जर है।
इसकी छत टूट गई है और बारिश के समय टपकती रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आईटीआई के नाम पर क्षेत्र के बेरोजगारों के साथ धोखा किया गया है। लोगों ने इस मामले में डीएम सी रविशंकर और एसडीएम विवेक प्रकाश को पत्र लिखा है। साथ ही शासन से आग्रह किया है कि आईटीआई का संचालन सही ढंग से किया जाए।
सही ढंग से न चला पाएं तो बंद कर दो
थल निवासी युवा समाजसेवी गिरीश पुनेठा का कहना है कि सरकार ने पता नहीं किस दबाव में आकर यहां पर आईटीआई खोल दिया। पिछले पांच साल में इस आईटीआई की कोई उपलब्धि नहीं है। सरकार को चाहिए कि जब वह इसे सही ढंग से संचालित नहीं कर पा रही है तो इसे बंद ही कर देना चाहिए।
उपयोगी ट्रेड की पढ़ाई शुरू की जाए
थल के समाजसेवी जीत बहादुर चंद का कहना है कि आईटीआई के लिए जमीन दिए जाने के बाद भी भवन का निर्माण न किए जाने से यह साबित होता है कि सरकार इस संस्था को सही ढंग से चलाने के पक्ष में नहीं है। उनका कहना है कि आईटीआई में उपयोगी ट्रेड में पढ़ाई शुरू की जाए और संसाधनों का विकास किया जाए।