पिथौरागढ़। नगर के आसपास के 22 गांवों को नगरपालिका में शामिल कर विकास प्राधिकरण के गठन के सरकार के फैसले का विरोध शुरू हो गया है। इस मुद्दे को लेकर लगातार आंदोलन करने और अदालत की शरण में जाने का भी ऐलान किया गया है।
पूर्व विधायक मयूख महर के नेतृत्व में बुधवार को कई गांवों के लोगों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में कहा गया है कि 1994 में भी इन गांवों को नगरपालिका में शामिल करने का प्रयास किया गया था। तब मयूख महर ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। सरकार की ओर से कोई पैरवी न होने के कारण इस याचिका का अब तक निस्तारण नहीं हुआ है।
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि गांवों को विकास प्राधिकरण में शामिल किया जाता है तो लोगों के पास गोचर, पनघट की जमीन भी शेष नहीं बचेगी। इन गांवों की अधिकांश जमीन पहले ही सेना अधिग्रहण कर चुकी है। तभी से गांववालों के सामने संसाधनों का संकट आ गया है।
ज्ञापन में उल्लेख है कि इन गांवों में लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि और पशुपालन है। यदि विकास प्राधिकरण में शामिल किया गया तो इन गांवों को विकासखंड और ग्राम पंचायत निधि से मिलने वाली सुविधा बंद हो जाएगी। विकास प्राधिकरण में शामिल करने के मामले में ग्रामीणों से कोई रायशुमारी नहीं की गई है और जबरन आदेश थोपकर सरकार लोगों के संवैधानिक अधिकारों का हनन करने में तुली है। ज्ञापन में इसे अमानवीय आदेश कहकर इसका पुरजोर विरोध करने और तत्काल इसे निरस्त करने की मांग की गई है।
ज्ञापन देने वालों में कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत, जिला पंचायत सदस्य नीमा सौन, प्रधान भूपेश नगरकोटी, राजेश उप्रेती, कुंडल महर, गौरव महर, भुवन पांडे, दीपक लुंठी, खीमराज जोशी, ब्लाक प्रमुख अंजू लुंठी, गजेंद्र वल्दिया आदि थे।