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धरातल पर भी नजर आने चाहिए विकास के दावे

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पिथौरागढ़। राजनीतिक दलों के विकास के दावे धरातल में भी दिखाई देने चाहिए। विकास, रोजगार, गरीबी दूर करने के दावे सभी चुनावों में किए जाते हैं, जबकि सच्चाई दावों से कोसों दूर होती है। ऐसी सरकार का चुनाव जरूरी है जो चुनाव के समय किए गए वायदों को पूरा करे। यह बात चाय पर चर्चा के दौरान लोगों ने कही।
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पिथौरागढ़ के शंकर टी स्टाल में सुबह के समय लोग चाय पीने जुटे तो राजनीतिक माहौल में राजनीति पर केंद्रित चर्चा भी शुरू हो ही गई। लोगों की बातचीत का विषय देश में व्याप्त बेरोजगारी और गरीबी रही। लोगों ने कहा कि देश में बेरोजगारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जबकि रोजगार के अवसर लगातार घट रहे हैं।

सरकारी क्षेत्र में लाखों पद खाली होने के बावजूद भरे नहीं जा रहे हैं। इन पदों को भरने से बेरोजगारी को काफी हद तक कम किया जा सकता है। लोगों ने कहा कि गरीबी तेजी से पैर पसार रही है। बेघरों के लिए आवास बनाने और रोजगार मुहैया कराने को लेकर सरकार को ठोस नीति बनानी होगी। तभी देश से गरीबी और बेरोजगारी की समस्या दूर हो सकती है। लोगों ने पर्वतीय क्षेत्र से हो रहे पलायन के लिए धरातल पर विकास नहीं होने को जिम्मेदार बताया। कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के विकास के लिए अलग नीति बनाए जाने की जरूरत है। चर्चा में बहादुर सिंह सामंत, त्रिलोक महर, गणेश डसीला, तुला ंसिह, राजपाल, करन सिंह रावत, दीपक पाल, आनंद कापड़ी आदि लोग शामिल थे।
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